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दो साल बाद दफ़नाए गए मृतक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो साल पहले आए विनाशकारी सुनामी मारे गए 125 लोगों को थाईलैंड में अब दफ़ना दिया गया है. काफी कोशिशों के बावजूद इनकी पहचान नहीं हो पाई. सुनामी ने दक्षिण पूर्वी एशिया में भयानक तबाही मचाई थी और दो लाख से अधिक लोग मारे गए थे. थाईलैंड में लगभग 5400 लोग मारे गए थे. इनमें आधे से अधिक विदेशी सैलानी थे. ऐसी ख़बरें हैं कि सुनामी के बाद अभी भी लगभग तीन हज़ार लोग लापता हैं. सुनामी में मारे गए लोगों के शव महीनों बाद तक मिलते रहे. इन शवों की पहचान करने में काफी दिक्कतें आई. इसे अब तक का सबसे बड़ा फोरेंसिक अभियान भी कहा जाता है. इसके बावजूद थाईलैंड में 125 शव ऐसे थे जिनकी पहचान डीएनए या दाँतों के रिकॉर्ड की पड़ताल से भी नहीं हो सकी. इन्हें बुधवार को फ़ुकेट के पास एक कब्रिस्तान में दफ़ना दिया गया. शव संरक्षण सभी शवों में माइक्रोचिप लगाए गए हैं और इन्हें एल्युमीनियम के ताबूत में रख कर दफ़नाया जा रहा है ताकि ज़रूरत पड़ने पर इन्हें बाद में भी निकाला जा सके. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये लोग बर्मा से आए मज़दूर थे. इनके परिजन इस हालत में नहीं रहे होंगे कि थाईलैंड आकर अपने रिश्तेदारों की खोज करें. सुनामी से थाईलैंड में पर्यटन उद्योग को भारी क्षति पहुँची थी लेकिन अब धीरे धीरे सैलानियों की संख्या बढ़ने लगी है. | इससे जुड़ी ख़बरें सुनामी प्रभावित इलाकों में पहुँचे क्लिंटन01 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जापान में सूनामी की हल्की लहरें15 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'सुनामी चेतावनी प्रणाली जुलाई तक'27 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'सुनामी प्रभावितों के साथ भेदभाव हुआ'02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सूनामी के बाद आँखें आज भी नम हैं04 जून, 2005 | भारत और पड़ोस चेतावनी देने वाली प्रणाली लगेगी09 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस मुसीबतें पहले ही क्या कम थीं कि...04 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना 'मृतकों की संख्या डेढ़ लाख से भी ऊपर'01 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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