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'परमाणु हथियार न रखना ख़तरनाक' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि परमाणु हथियारों का विकल्प छोड़ना देश के लिए 'ख़तरनाक' होगा और 'बुद्धिमानी' वाला फ़ैसला नहीं होगा. उन्होंने ट्राइडेंट मिसाइल ले जाने की क्षमता रखने वाली नई पनडुब्बी बनाने टोनी ब्लेयर ने कहा कि पनडुब्बियों की संख्या चार से तीन की जा सकती है जबकि परमाणु हथियारों में 20 फ़ीसदी की कटौती की जाएगी. ब्रितानी प्रधानमंत्री का कहना था कि शीत युद्ध समाप्त हो गया है लेकिन ब्रिटेन को परमाणु हथियारों की ज़रूरत है क्योंकि कोई नहीं बता सकता कि कब परमाणु ख़तरा फिर से पैदा हो जाए. उन्होंने कहा कि नई पनडुब्बियों पर 15 से 20 अरब डॉलर का खर्च आएगा. इन्हें बनाने में 17 साल का समय लगेगा और ये 2050 चक काम करेंगी. टोनी ब्लेयर की अपनी लेबर पार्टी के कई सदस्य इस योजना के ख़िलाफ़ है लेकिन विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी का कहना है कि परमाणु हथियार न रखना मूर्खतापूर्ण होगा. जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी इस बारे में फ़ैसला 2014 तक टालना चाहती है. ब्रितानी सासंद इस मुद्दे पर बहस के बाद तीन महीने बाद वोट डालेंगे. वर्तमान ट्राइडेंट प्रणाली 2020 के शुरुआत में ख़त्म हो जाएगी. टोनी ब्लेयर का कहना है कि उससे पहले नई प्रणाली की व्यवस्था हो जानी चाहिए. कई विशेषज्ञों का मानना है कि योजना पर खर्च होने वाला पैसा कहीं और लगाया जा सकता था. परमाणु विरोधी गुट, सीएनडी से जुड़ी केट हडसन का कहना है कि अगर ब्रिटेन नए परमाणु हथियार बनाता है तो कई अन्य देश इन हथियारों का प्रसार करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु संयंत्रों को ख़तरा बढ़ा: पाटिल22 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'चीन को परमाणु समझौता स्वीकार'26 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सीनेट में परमाणु समझौता बहुमत से पास17 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान ने 'परमाणु कार्यक्रम' तेज़ किया27 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'परमाणु क्षमता 30 देशों के पास होगी'17 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं'11 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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