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रविवार, 12 नवंबर, 2006 को 02:50 GMT तक के समाचार
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अरब देशों ने अमरीका की निंदा की
इसराइली हमले के शिकार
इसराइली हमलों से ग़ज़ा के लोगों में भारी नाराज़गी है
अरब देशों ने अमरीका की ओर से ग़ज़ा पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को वीटो करने की निंदा की गई है.

अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र में ग़ज़ा पर आए एक प्रस्ताव को वीटो कर दिया है जिसमें इसराइली सेना के ग़ज़ा अभियान की आलोचना की गई थी.

संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने इस प्रस्ताव के मसौदे को असंतुलित और राजनीति से प्रेरित क़रार दिया.

संयुक्त राष्ट्र में अरब देशों के दूत याहया महमस्सानी ने बोल्टन की इन आपत्तियों को निराधार बताया है और कहा है कि इस प्रस्ताव में किसी भी तरह का पक्षपात नहीं किया गया है.

उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव में दोनों पक्षों से कहा गया था कि वे संघर्ष रोकें, नागरिकों का सम्मान करें और आपस में बातचीत करें.

फ़लस्तीनी प्राधिकरण के एक प्रवक्ता ग़ाज़ी हामद ने कहा है कि अमरीका का इस प्रस्ताव को वीटो करना इसराइली कार्रवाई को वैध करार देता है साथ ही यह इस तरह की कार्रवाइयों को आगे भी जारी रखने के लिए हरी झंडी है.

वहीं क़तर के राजदूत ने कहा कि वीटो से सुरक्षा परिषद की साख पर सवाल उठ खड़ा हुआ है और इससे मध्य पूर्व में हिंसा का दौर जारी रहेगा.

प्रस्ताव और वीटो

इस प्रस्ताव का मसौदा क़तर ने पेश किया था जिसमें इस सप्ताह ग़ज़ा में इसराइली हमले में 18 फ़लस्तीनी नागरिकों के मारे जाने की निंदा की गई थी.

 अमरीका फ़लस्तीनी लोगों की मौतों के प्रति खेद व्यक्त करता है लेकिन वह प्रस्ताव की भाषा से सहमत नहीं है.
जॉन बाल्टन, अमरीकी राजदूत

इस प्रस्ताव का सुरक्षा परिषद के 15 में से 10 सदस्य देशों ने समर्थन किया जबकि चार सदस्य अनुपस्थित रहे.

अनुपस्थित रहनेवाले देशों में ब्रिटेन, डेनमार्क, जापान और स्लोवाकिया शामिल थे.

इस साल यह दूसरी बार है जब अमरीका ने ग़ज़ा में इसराइल के सैन्य अभियान के संबंध में प्रस्ताव को वीटो किया है.

इसके पहले एक सैनिक को मुक्त कराने के इसराइल के अभियान के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव आया था.

 अमरीका का इस प्रस्ताव को वीटो करना इसराइली कार्रवाई को वैध करार देता है साथ ही यह इस तरह की कार्रवाइयों को आगे भी जारी रखने के लिए हरी झंडी है
ग़ाज़ी हामद, प्रवक्ता, फ़लस्तीनी प्राधिकरण

प्रस्ताव में इसराइल के ग़ज़ा के बेत हनोन में किए हमले की निंदा की गई थी और इसराइली सेनाओं की वापसी की बात कही गई थी.

लेकिन बाद में प्रस्ताव में जोड़ा गया कि फ़लस्तीनी ऑथारिटी हिंसा रोकने के लिए कार्रवाई करे और संयुक्त राष्ट्र महासचिव इन मौतों की जाँच के लिए एक आयोग गठित करे.

अमरीकी राजदूत का कहना था कि अमरीका फ़लस्तीनी लोगों की मौतों के प्रति खेद व्यक्त करता है लेकिन वह प्रस्ताव की भाषा से सहमत नहीं है.

इसराइल ने पिछले महीने सैन्य अभियान शुरू किया था.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नागरिक इलाक़े में इसराइली टैंकों ने गोले दागे थे जिससे एक ही परिवार के कई लोगों की मौत हो गई. इसमें महिलाएँ और बच्चे शामिल थे.

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