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बंदियों के मुद्दे पर हिज़्बुल्ला-इसराइल वार्ता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनानी चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्ला ने कहा है कि इसराइल के साथ दोनो ओर के बंदियों को एक दूसरे को सौंपने के मुद्दे पर गंभीर, परोक्ष बातचीत चल रही है. हिज़्बुल्ला के नेता शेख़ हसन नसरल्ला ने कहा कि ये परोक्ष वार्ता ऐसी स्थिति में है जब विचार विमर्श, प्रस्तावों के आदान-प्रदान और शर्तों पर बात हो रही है. उनका कहना था कि ये बातचीत सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के नियुक्त मध्यस्थ के ज़रिए हो रही है और प्रगति हो रही है. 'अवधि तय नहीं' हिज़्बुल्ला ने जुलाई में दो इसराइली सैनिकों को अगवाह कर लिया था जिसकें बाद इसराइल ने दक्षिणी लेबनान पर व्यापक सैनिक हमला कर दिया था. इस हमले से लेबनान में भीषण तबाही हुई थी और 1200 लोग मारे गए थे. ये लड़ाई 34 दिन चली थी. अगस्त में हिज़्बुल्ला के नेता हसन नसरल्ला ने कहा था कि यदि उसे एहसास होता कि इसराइली सैनिकों को पकड़ने से युद्ध छिड़ जाएगा तो वह ऐसा न करता. लेकिन हिज़्बुल्ला नेता ने ये नहीं बताया है कि बातचीत के ज़रिए इस मुद्दे का हल खोजने में कितनी देर लग सकती है. उनका केवल इतना कहना था कि ये 'इस पर निर्भर करेगा कि बातचीत कैसे आगे बढ़ती है.' इसराइल ने फ़िलहाल इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है. ग़ौरतलब है कि जिस संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के ज़रिए युद्ध ख़त्म हुआ था, उसमें बंदियों की बिना शर्त रिहाई की बात कही गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ब्रिटेन लेबनान की मदद करे'11 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना इसराइल ने 'दुखद ग़लती' की बात मानी15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'नाकाम आत्मघाती हमलावर' को मृत्युदंड21 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना इसराइल पर फ़लस्तीनियों में मतभेद22 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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