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रिपोर्टिंग का 'सबसे अहम क्षण' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्वांगदोंग के प्रशासन के लिए मेरी चीन में रिपोर्टिंग की यात्रा का ये सबसे बड़ा ‘क्षण’ था. प्रशासन के मुखिया यानि - गवर्नर होआंग होआ होआ का इंटरव्यू ! वो भी किसी विदेशी पत्रकार के साथ !! पूरा प्रशासन सतर्क था, हर एक बात की रिहर्सल, कौन कहाँ बैठेगा, कौन कब क्या बोलेगा, कितने बजे इंटरव्यू शुरू होगा और कब समाप्त होगा. पहली बार इतना ‘सीरियसली’ लिए जाने पर मैं भी अचम्भे में पड़ गया. इंटरव्यू के लिए मैं तो हमेशा ही तैयारी करता हूं, लेकिन पहली बार लगा कि दूसरी तरफ भी कोई हमें इतनी गंभीरता से ले रहा है !! मेरा पहला सवाल – “ आपके देश में भ्रष्टाचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं, आप भी कहीं चिंतित तो नहीं? ” किसी अन्य जगह के लिए ये सवाल ‘मामूली’ कहलाता, लेकिन चीन में नहीं. यहाँ भ्रष्टाचार पर आप किसी से, चाहे कितना भी घुमा फिरा कर सवाल कर लें, जवाब में ‘हाँ’ और ‘न’ के बीच दबी एक मुस्कुराहट ही मिलती है. इंटरव्यू के दौरान जब जब गवर्नर मुस्कुराते, तो बाकी लोगों की आँखों में मानो एक चमक सी आ जाती. अरे हाँ, आपको ये बताना तो भूल ही गया कि इस ‘अवसर’ पर कमरे में गवर्नर के सभी सलाहकार मौजूद थे, यहाँ तक कि एक टीवी कैमरा भी था. |
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