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चीन की दीवार पर नहीं होंगी पार्टियाँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन की ऐतहासिक दीवार पर आयोजित होने वाली पार्टियों और रात भर चलने वाले संगीत समारोहों का आनंद लोग अब नहीं उठा सकेंगे. चीन सरकार ने ऐसे आयोजनों पर पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया है. इस दीवार पर लिखने या वाहन चलाने पर भी अब रोक लगाई जा रही है. नए नियमों का उल्लंघन करने वालों को तीस लाख रूपए तक का जुर्माना अदा करना पड़ सकता है. चौसठ सौ किलोमीटर लंबी इस दीवार को देखने के लिए प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ लोग आते हैं. इनमें से अधिकतर लोग बादलिंग के क़रीब के दस किलोमीटर के इलाक़े में घूमने आते हैं. प्रतिबंध चीन सरकार की वेबसाइट के अनुसार एक दिसंबर से इस दीवार के निकट से किसी तरह की मिट्टी या ईंट हटाने पर मनाही होगी. साथ ही इन क्षेत्रों में पेड़ लगाने और दीवार पर चित्र उकेरने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. वेबसाइट के मुताबिक़ जो इलाक़े पर्यटकों के लिए खुले नहीं है उनमें गाड़ियाँ चलाने और अन्य आयोजनों पर भी रोक लगा दी जाएगी. चीन की राजधानी बीजिंग से बीबीसी संवाददाता डैन ग्रिफ़िथ्स के अनुसार पिछले कुछ सालों से इस ऐतिहासिक दीवार के पास पार्टियाँ और रात-भर चलने वाले समारोहों का आयोजित होना आम बात हो गई है. संवाददाता के अनुसार दीवार के कई हिस्से खराब स्थिति में है और बिगड़ती हालत के बावजूद सरकार पर्यटकों की संख्या में कटौती करने को लेकर हिचकिचाती रही है. सरकार को आशंका है कि पर्यटकों की संख्या में कमी से स्थानीय लोगों के कारोबार पर बुरा असर पड़ सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय कलाइयों पर चीनी राखियाँ30 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस वजूद की लड़ाई लड़ता कोलकाता का चीनी समुदाय11 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस चीन के अंतरिक्ष यात्री की वापसी की तैयारी15 अक्तूबर, 2003 को | भारत और पड़ोस चीन ने तिब्बत तक पहली रेल लाइन बनाई16 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस चार दशकों बाद नाथू ला दर्रे से व्यापार05 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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