|
उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध को स्वीकृति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के बाद उस पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1718 के पारित होने के साथ ही उत्तर कोरिया पर कई सैन्य सामग्री नहीं मिल सकेगी और आर्थिक प्रतिबंध लग जाएगा. लेकिन इस प्रस्ताव में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की बात नहीं की गई है. उल्लेखनीय है कि पिछले सोमवार को उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि उसने परमाणु परीक्षण किया है. इस प्रस्ताव पर मतदान के बाद उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि बाहर चले गए. इस प्रस्ताव के मसौदे पर मतभेद होने की वजह से इस पर घंटों बहस चलती रही और मतदान में विलंब हुआ. अमरीका चाहता था कि उत्तर कोरिया को सख़्त संदेश दिया जाए कि उसके परमाणु हथियार बनाने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लेकिन रुस और चीन चाहते थे कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ उठाए जाने वाले क़दम बहुत सख़्त न हों. उनका कहना था कि ज़्यादा सख़्ती से मामला और बिगड़ जाएगा और ये दोनों ही देश चाहते हैं कि उत्तर कोरिया को परमाणु कार्यक्रम के मसले पर फिर से बहुपक्षीय बातचीत के लिए लौटना चाहिए. प्रस्ताव के मुख्य बिंदु सुरक्षा परिषद ने जो प्रस्ताव पारित किया है उसमें कहा गया है कि उत्तर कोरिया अपना परमाणु हथियार, महाविनाश के हथियार और बैलेस्टिक मिसाइलें नष्ट करे.
इसके आधार पर सभी देशों पर यह रोक लग गई है कि वे उत्तर कोरिया को किसी भी ग़ैरपारंपरिक हथियार निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध न करवाएँ और टैंक, मिसाइल और हेलीकॉप्टर जैसे बड़े उपकरण न बेचे. इसमें कहा गया है कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े व्यक्तियों और व्यावसायिक संगठनों के खाते सील कर दिए जाएँ. इसके बाद उत्तर कोरिया जा रहे जहाज़ों की जाँच की जा सकेगी. उत्तर कोरिया को बिना शर्त छह देशों की वार्ता के लिए फिर से लौटने की बात भी प्रस्ताव में है. प्रस्ताव में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ किसी तरह की सैन्य कार्रवाई की बात नहीं की गई है. संदेश संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बॉल्टन ने कहा है कि जिस परमाणु परीक्षण का दावा उत्तर कोरिया ने किया है वह "इस समय दुनिया भर की शांति और सुरक्षा के लिए गंभीरतम चुनौतियों में से एक है." उनका कहना था कि इस प्रस्ताव से उत्तर कोरिया और दूसरे देशों को साफ़ संकेत मिल सकेगा कि इसके परिणाम गंभीर होंगे. चीन ने हालांकि प्रस्ताव का समर्थन किया लेकिन उसके प्रतिनिधि ने कहा है कि जहाज़ों की जाँच को लेकर उनके देश की अपनी अलग राय है. उनका कहना था कि यह 'भड़काने वाला' क़दम हो सकता है. इस प्रस्ताव पर मतदान अमरीका की उस रिपोर्ट के बाद हुआ है जिसमें कहा गया है कि आरंभिक जाँच से उत्तर कोरिया के परमाणु ठिकाने के पास रेडियोएक्टिव गैसों का पता चला है. अमरीका का कहना है कि जाँच के इस नतीजे से यह नहीं कहा जा सकता कि परमाणु परीक्षण सफल रहा लेकिन यह ज़रुर कहा जा सकता है कि इसका प्रयास किया गया था. उल्लेखनीय है कि पिछले सोमवार को उत्तर कोरिया के दावे के बाद से यह भ्रम बना हुआ है कि उत्तर कोरिया ने वास्तव में परमाणु परीक्षण किया था, या परीक्षण किया और असफल हो गया या फिर उत्तर कोरिया का दावा ही झूठा है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'स्पष्ट प्रस्ताव में उत्तर कोरिया की निंदा हो'14 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना नए प्रस्ताव में प्रतिबंधों का प्रावधान13 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'और परमाणु परीक्षण कर सकते हैं'11 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया को मनाने में जुटा रुस06 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना जॉर्ज बुश ने कहा, सुरक्षा परिषद तुरंत कार्रवाई करे09 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया ने किया परमाणु विस्फोट09 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'उत्तर कोरिया हथियार चुने या भविष्य'05 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||