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मंगलवार, 03 अक्तूबर, 2006 को 02:32 GMT तक के समाचार
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बान महासचिव पद की दहलीज़ पर
बान कि मून
बान का कहना है कि वो सबको साथ लेकर चलने का सिद्धांत अपनाएँगे
सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों का समर्थन मिलने से दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री बान की मून का संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनना लगभग तय है.

तीसरे स्ट्रॉ पोल में बान से पिछड़ने के बाद भारत समर्थित दूसरे सशक्त उम्मीदवार शशि थरूर ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है.

इस मतदान का मतलब ये है कि यदि कोई बहुत बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो बान कि मून संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव होंगे.

व्यापक समर्थन

मतदान के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बॉल्टन ने कहा, "अभी भी नए उम्मीदवार चाहें तो सामने आ सकते हैं लेकिन मैने किसी नए उम्मीदवार का नाम नहीं सुना है. दरअसल मुझे आश्चर्य होगा यदि कोई सामने आता है."

 भविष्य का महासचिव ऐसा होना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र के भीतर मौजूद अलग अलग मतों को सौहार्दपूर्वक एक साथ रख सके और मैं यही भूमिका निभाने की कोशिश करूंगा
बान कि मून

वहीं संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग ग्वांग्या ने कहा कि बान एक उत्तम उम्मीदवार साबित होंगे.

उन्होंने कहा, "मेरी समझ से वो काफ़ी अनुभवी हैं, सरगर्मियों से दूर रहने वाले लेकिन अपने फ़ैसलों को दृढ़ता से सामने रखते हैं. लेकिन साथ ही मैं ये भी कहना चाहता हूं कि एशियाई लोग अपनी ख़ासियत एक अलग अंदाज़ में दिखाते हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि वो महासचिव के पद के लिए उपयुक्त रहेंगे."

62 वर्षीय बान के बारे में कई लोगों का कहना है कि वो उस कद के नहीं हैं जो महासचिव के पद के लिए ज़रूरी है लेकिन अमरीका के नज़रिए से देखें तो उन्हें एक विश्व स्तर का प्रशासक चाहिए न कि दुनिया का भ्रमण करनेवाला एक कूटनीतिक सितारा और उस लिहाज़ से बान सही बैठते हैं.

काम के धुनी

बान के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अपने काम के अलावा कुछ नहीं नज़र आता. पिछले दो सालों से उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली है और वो इस ऊँचाई पर बिना कोई दुश्मन बनाए हुए पहुंचे हैं.

 अभी भी नए उम्मीदवार चाहें तो सामने आ सकते हैं लेकिन मैने किसी नए उम्मीदवार का नाम नहीं सुना है. दरअसल मुझे आश्चर्य होगा यदि कोई सामने आता है
बोल्टन

उनका कहना है कि वो सबको साथ लेकर चलने का सिद्धांत अपनाएँगे और काफ़ी हद तक बँटे हुए संयुक्त राष्ट्र को एकजुट करने की कोशिश करेंगे.

वो कहते हैं, "भविष्य का महासचिव ऐसा होना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र के भीतर मौजूद अलग अलग मतों को सौहार्दपूर्वक एक साथ रख सके और मैं यही भूमिका निभाने की कोशिश करूंगा, एक मध्यस्थ की, एक संतुलन बनाने वाले की."

अनुभव

बतौर राजनयिक बान को काफी अनुभव प्राप्त है. वह संयुक्त राष्ट्र और अमरीका स्थित दक्षिण कोरियाई दूतावास में काम कर चुके हैं और ऑस्ट्रिया में अपने देश के राजदूत रह चुके हैं.

जनवरी 2004 में विदेश मंत्री बने बान ने उत्तर कोरिया के साथ छह पक्षीय बातचीत शुरु करने में अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने 1970 में सोल विश्वविद्यालय से 'इंटरनेशनल रिलेशंस' विषय से स्नातक की उपाधि हासिल की.

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