|
'इराक़ युद्ध से बढ़ा आतंकवाद का खतरा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी की गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार इराक़ युद्ध के कारण इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद का ख़तरा बढ़ गया है. अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने 'नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है, ‘‘इराक़ पर अमरीकी हमले और वहाँ सेना के टिके रहने से आतंकवाद की समस्या और विकराल हुई है.’’ इस रिपोर्ट को अमरीका की 16 ख़ुफ़िया एजेंसियों के संगठन नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल ने तैयार किया है और यह इराक़ युद्ध के बाद अमरीका में वैश्विक आतंकवाद पर पहला संपूर्ण आकलन है. नई पीढ़ी “वैश्विक आतंकवाद की प्रवृत्तियाँ : अमरीका के लिए मायने ’’ शीर्षक से तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामी कट्टरपंथ घटने के बजाय तेज़ी से पूरी दुनिया में पाँव पसार रहा है. रिपोर्ट के शुरू में कहा गया है, “ जेहाद की विचारधारा के प्रसार में इराक़ युद्ध की अहम भूमिका रही है.” इसमें आगे कहा गया है कि अल-कायदा के नेतृत्व से ‘प्रेरणा’ लेकर कई छोटे-छोटे संगठन भी इस्लामी उन्माद को बढ़ाने में लग गए हैं, हालाँकि उनका ओसामा बिन लादेन या उनके शीर्ष कमांडरों से कोई संबंध नहीं हैं. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि कैसे इंटरनेट आतंकवादियों के लिए वरदान साबित हो रहा है. इसके अनुसार अब उनके लिए भौगोलिक बाधाओं के कोई मायने नहीं रह गए है. साथ ही उनके लिए आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना आसान हो गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें आतंकवाद पर स्पष्ट रुख़ अपनाएँ: मनमोहन16 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'मुशर्रफ़ से आतंकवाद पर चर्चा होगी' 15 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान आतंकवाद पर संजीदा नहीं'12 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आतंकवादी हमलों का ख़तरा बरकरार-बुश12 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग दिशाहीन हुई09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध की सच्चाई09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना जर्मनी में 'आतंकवादी' हमले की चेतावनी20 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||