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गुरुवार, 14 सितंबर, 2006 को 15:01 GMT तक के समाचार
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हिज़्बुल्ला पर युद्धापराधों का आरोप
लेबनान में लड़ाई
34 दिन चली लड़ाई में लेबनान में भारी तबाही हुई थी
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगटन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने लेबनान के एक संगठन हिज़्बुल्ला को इसराइल के साथ लड़ाई के दौरान यु्द्धापराधों का ज़िम्मेदार ठहराया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि हिज़्बुल्ला ने इसराइल के साथ 34 दिन की लड़ाई के दौरान जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाकर रॉकेट दागे जोकि "जोकि मानवाधिकार क़ानून का गंभीर उल्लंघन" है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इसराइल पर पहले ही आरोप लगा चुका है कि उसने हिज़्बुल्ला के साथ लड़ाई के दौरान लेबनान में आम नागरिकों को निशाना बनाकर युद्धापराध किए हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसराइल-हिज़्बुल्ला लड़ाई में मानवाधिकार क़ानूनों के उल्लंघन की जाँच संयुक्त राष्ट्र से कराने का अनुरोध किया है.

हिज़्बुल्ला ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की इस रिपोर्ट का नकार दिया है और उसे इसराइली और अमरीकी दबाव में तैयार की गई रिपोर्ट बताया है.

हिज़्बुल्ला के एक सांसद हसन फ़ज़लल्लाह ने कहा है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को हिज़्बुल्ला को युद्धापराध का दोषी बताए जाने से पहले दोनों तरफ़ मारे गए आम लोगों की संख्या की तुलना करनी चाहिए.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि इसराइल ने जो उल्लंघन किए हैं उनकी वजह से हिज़्बुल्ला अपनी कार्रवाइयों को सही नहीं ठहरा सकता.

'कोई दलील नहीं'

एमनेस्टी इंटरनेशनल की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है, "हिज़्बुल्ला ने उत्तरी इसराइल में जानबूझकर आम लोगों और नागरिकों के ठिकानों को निशाना बनाकर रॉकेट दागे, साथ ही ये हमले अंधाधुंध थे जो कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत युद्धापराध है."

एमनेस्टी इंटरनेशनल कि रिपोर्ट कहती है कि हिज़्बुल्ला ने उत्तरी इसराइल में लगभग चार हज़ार रॉकेट दागे थे जिनसे लगभग 43 आम लोगों की मौत हुई और हज़ारों लोगों को अपने अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों को भागना पड़ा था.

शेख़ हसन नसरल्लाह
एमनेस्टी का कहना है कि नसरल्लाह ने अपना बयान बदला

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार हालाँकि हिज़्बुल्ला का कहना है कि उसकी नीति आम लोगों को निशाना बनाने की नहीं रही है, इसके नेता शेख़ हसन नसरल्लाह ने कहा कि लेबनान में नागरिक इलाक़ों में इसराइली हमले के बदले में कार्रवाई के लिए उस नीति में बदलाव किया गया था.

एमनेस्टी इंटरनेशनल कि रिपोर्ट में नसरल्लाह का बयान दिया गया है, "जहाँ तक दुश्मन अपना आक्रमण हदों से आगे जाकर या रैड लाइन की परवाह किए बिना करता है तो हम भी उसी तरह बिना किसी हद या रैड लाइन से आगे जाकर कार्रवाई करेंगे."

एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव इरीन ख़ान ने कहा, "किसी भी पक्ष की ग़ैरक़ानूनी कार्रवाई के लिए आम लोगों को क़ीमत चुकाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता."

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसराइल-हिज़्बुल्ला लड़ाई के दौरान हुए विभिन्न उल्लंघनों की "व्यापक, स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराई जाए."

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि जो पक्ष आम लोगों की मुश्किलों के लिए ज़िम्मेदार हैं वे अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रहे हैं. महासचिव इरीन ख़ान ने कहा, "अगर युद्ध के नियमों को कुछ सम्मान देने के मामले को गंभीरता देनी है तो न्याय की सख़्त ज़रूरत है."

23 अगस्त को जारी एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि इसराइल ने लेबनान में घरों, पुलों, सड़कों और जल-तेल के ठिकानों को निशाना बनाया और यह उसकी रणनीति का प्रमुख हिस्सा था.

इसराइली सरकार के प्रवक्ता मार्क रीगेव ने कहा था कि लड़ाई के दौरान इसराइल की कार्रवाई "लड़ाई के मान्य नियमों और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों" के अनुरूप थी.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि इसराइल-हिज़्बु्ल्ला लड़ाई के अन्य पहलुओं के बारे में अलग से रिपोर्टें प्रकाशित की जाएंगी.

34 दिन चली इसराइल और हिज़्बुल्ला की लड़ाई में लगभग 1300 आम लेबनानी और 161 इसराइली मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर सैनिक थ

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