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गुरुवार, 31 अगस्त, 2006 को 16:39 GMT तक के समाचार
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लेबनानी प्रधानमंत्री की मदद की गुहार
लेबनान में इसराइली हमलों से हुई तबाही
लेबनान में इसराइली हमलों से भारी तबाही हुई है
लेबनान के प्रधानमंत्री फ़ुआद सिन्यूरा ने अपने देश के पुनर्निर्माण पर हो रहे अंतरराष्ट्रीय दानदाता सम्मेलन में मदद की भावुक अपील की है.

उन्होंने कहा है कि इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच भीषण लड़ाई के बाद देश का बुनियादी ढाँचा बिखर चुका है और उसे फिर से बनाने के लिए तुरंत मदद की ज़रूरत है.

फ़ुआद सिन्यूरा ने कहा है कि लेबनान एक ऐसा देश था जिसमें ख़ुशहाली और प्रगति नज़र आती थी लेकिन अब वहाँ तबाही, विस्थापन और मौत के निशान नज़र आते हैं.

सिन्यूरा ने स्वीडन के स्टॉकहोम में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि इसराइली हमले ने लेबनान में अरबों डॉलर की तबाही की है और अगर इसराइल ने लेबनान के सभी हिस्सों से अपनी सेना नहीं हटाई तो पुनर्निर्माण के कार्यों में बाधा आएगी.

इस सम्मेलन में उम्मीद जताई गई है कि लेबनान के पुनर्निर्माण कार्यों के लिए पचास करोड़ डॉलर की रक़म जुटाई जा सकेगी.

लेबनान के पुनर्निर्माण कार्यों पर कुल साढ़े तीन अरब डॉलर से ज़्यादा का ख़र्च आने का अनुमान लगाया गया है.

इस बीच इसराइल ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में उस सीमावर्ती इलाक़े का एक हिस्सा वापिस कर दिया है जिस पर हाल की लड़ाई के दौरान क़ब्ज़ा कर लिया गया था.

यह पहला मौक़ा है जब इसराइल ने दो सप्ताह पहले हुए युद्ध विराम के बाद लेबनान कोई हिस्सा वापिस किया है.

सम्मेलन

लगभग 40 देशों के मंत्री और अनेक संगठनों के प्रतिनिधि लेबनान के पुनर्निर्माण के लिए लगभग पचास करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने के वास्ते स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में बैठक कर रहे हैं.

इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और रेडक्रॉस के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं.

यूरोपीय संघ लेबनान को तुरंत पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने के लिए चार करोड़ बीस लाख यूरो की रक़म देने की पेशकश कर चुका है लेकिन स्वीडन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन ज़ांची ने कहा कि बैठक का आयोजन करने वालों को काफ़ी ज़्यादा रक़म के वादे मिलने की उम्मीद है.

ग़ैरसरकारी संस्था ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि इसराइली बमबारी ने लेबनान के कृषि ढाँचे को तहस-नहस कर दिया है और अर्थव्यवस्था को भारी नुक़सान पहुँचाया है.

ऑक्सफ़ैम के अनुसार लेबनान में इसराइली बमबारी ऐसे समय में हुई जब वहाँ खेती काटने के लिए तैयार थी मगर बमबारी की वजह से किसानों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा और उनकी खेती तबाह हो गई.

संस्था के अनुमान के अनुसार इस लड़ाई में लेबनान में लगभग एक लाख सत्तर हज़ार किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

ऑक्सफ़ैम के कार्यकारी निदेशक जेरेमी हॉब्स ने कहा, "लेबनान सड़कों, पुलों और इमारतों की तबाही साफ़ नज़र आती है मगर लेकिन ईंटों और टाइलों के इस नुक़सान से भी बड़ा नुक़सान सैकड़ों एकड़ की खेतीबाड़ी की तबाही के रूप में हुआ है."

उन्होंने कहा कि स्वीडन में बैठक करने वाले दानदाता देश और संगठनों को लेबनान को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद के लिए खुलकर धन देना चाहिए.

'अनैतिक'

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान लेबनान में युद्ध विराम मज़बूत करने के प्रयासों के तहत जॉर्डन और सीरिया से बातचीत करने वाले हैं.

लेबनान के आर्थिक ढाँचे को बड़ा नुक़सान हुआ है
लेबनान के आर्थिक ढाँचे को बड़ा नुक़सान हुआ है

इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच युद्ध विराम को अब दो सप्ताह पूरे हो चुके हैं. उससे पहले एक महीने से ज़्यादा दोनों पक्षों के बीच भीषण युद्ध हुआ था.

लेबनान सरकार ने अनुमान ज़ाहिर किया है कि इसराइली हवाई बमबारी में लगभग तीन अरब 60 करोड़ डॉलर की तबाही हुई है और देश की प्रगति को अनेक वर्ष पीछे धकेल दिया है.

लेबनान के प्रधानमंत्री फुआद सिन्यूरा ने कहा कि लगभग एक लाख तीस हज़ार घर या तो पूरी तरह तबाह हो गए हैं या फिर उन्हें बड़ा नुक़सान हुआ है.

लेबनान सरकार ने अस्थाई आवास बनाने के लिए साढ़े सात करोड़ डॉलर और मुख्य सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए लगभग तीन करोड़ डॉलर की रक़म की माँग की है.

ताज़ा युद्ध होने से पहले लेबनान मध्य पूर्व क्षेत्र में एक अच्छी अर्थव्यवस्था वाला देश था जिसमें सरकार ने छह प्रतिशत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई थी और सरकार अपनी क़र्ज़ अदायगी भी कर रही थी.

लेबनान सरकार ने बारूदी सुरंगों और बिना फटे क्लस्टर बमों को हटाने के लिए भी धन की माँग की है. बारूदी सुरंगों और बिना फटे क्लस्टर बमों की वजह से बहुत से किसान अपने खेतों में कामकाम नहीं कर पा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत विभाग के मुखिया ने बुधवार को कहा था कि इसराइल ने जिस तरह हज़ारों क्लस्टर बम लेबनान में गिराए, वो "बिल्कुल अनैतिक" था.

उधर इसराइल ने कहा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल ग़ैरक़ानूनी नहीं था.

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