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सैनिकों की संख्या पर शिराक के सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने कहा है कि वह नहीं समझते कि लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की बढ़ी हुई सेना में पंद्रह हज़ार तक सैनिक होने की ज़रूरत है. उन्होंने पंद्रह हज़ार की संख्या को 'बहुत ज़्यादा' बताया है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने शुक्रवार को जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल की पेरिस यात्रा के मौक़े पर पत्रकारों से मुलाक़ात में यह बात कही. लेकिन लेबनान में 1600 और सैनिक भेजने की फ्रांस की घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र की नई सेना के वजूद के बारे में सवाल उठने लगे हैं. लेबनान में भेजे जाने वाले शांति सैनिकों की संख्या के बारे में सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति शिराक ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि शांति सेना की संख्या 15 हज़ार होनी चाहिए, जैसाकि संयुक्त राष्ट्र ने मांग की है. उन्होंने कहा कि यह संख्या काफ़ी ज़्यादा है हालाँकि उन्होंने यह भी नहीं कहा कि कितनी संख्या उपयुक्त होगी, "चार, पाँच या छह हज़ार." लेबनान में तैनात होने वाली बढ़ी हुई शांति सेना में फ्रांस की भागीदारी के फ़ैसले में देरी के बारे में पूछे जाने पर शिराक ने कहा कि एक राष्ट्राध्यक्ष सेना प्रमुख होने के नाते उनके लिए यह काफ़ी ग़ैरज़िम्मेदाराना साबित हो सकता था कि शांति सैनिकों के कामकाज के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बिना उनकी तैनाती से बहुत से सैनिकों के जीवन के लिए ख़तरा हो सकता था. शिराक ने कहा कि इन चिंताओं के बारे में जैसे ही आश्वासन मिले तो फ्रांस ने सैनिक भेजने के बारे में फ़ैसला कर दिया. | इससे जुड़ी ख़बरें अन्नान की शांति सेना के मुद्दे पर बैठक25 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना फ्रांस शांति सैनिक बढ़ाएगा 24 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना अमरीका लेबनान को 23 करोड़ डॉलर देगा21 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना यहूदी बस्तियाँ हटाने की योजना स्थगित18 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना युद्ध के बाद निराशा झेल रहे हैं ओल्मर्ट18 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'यूरोपीय देश तुरंत शांति सैनिक भेजें'18 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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