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'यूरोपीय देश तुरंत शांति सैनिक भेजें'
लेबनानी सैनिक
चालीस वर्षों बाद दक्षिणी लेबनान में पहुँचे हैं लेबनानी सैनिक
संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर दक्षिणी लेबनान में तुरंत शांति सैनिक भेजने के लिए देशों से अपील की है. संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव मार्क मलोच ब्राउन ने कहा कि शांति सेना में कई देशों के सैनिक होने आवश्यक हैं ताकि इसे दोनों पक्षों का समर्थन मिल सके.

उन्होंने ख़ास तौर पर यूरोपीय देशों से अपील की कि वे आगे आएँ और 10 दिनों के अंदर भेजे जाने वाले साढ़े तीन हज़ार शांति सैनिकों में अपने सैनिक भी भेजें.

ब्राउन ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि सैनिक भेजने के मुद्दे पर उन्हें इटली और फ़्रांस की ओर से प्रस्ताव मिला है लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई देशों ने शांति सैनिकों के कामकाज पर स्पष्टीकरण मांगा है.

दक्षिणी लेबनान में बहुराष्ट्रीय शांति सेना भेजने के लिए तैयार देशों ने स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग की है. इन देशों का कहना है कि शांति मिशन के लिए भेजी जाने वाली सेना का क्या काम होगा- इसकी जानकारी नहीं है.

इटली की सरकार ने शांति सेना भेजने पर सहमति तो दे ही है लेकिन इसे संसद की मंज़ूरी मिलना बाक़ी है. लेकिन प्रधानमंत्री रोमानो प्रोदी का कहना है कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से सेना के कामकाज के बारे में जानकारी मांगी है.

इटली की सरकार का कहना है कि वह लेबनान में तीन हज़ार सैनिक भेजने के लिए तैयार है. फ्रांस ने भी संयुक्त राष्ट्र से सेना के काम के बारे में पूरी जानकारी मांगी है.

हालाँकि फ़्रांस ने अभी तक सिर्फ़ 200 सैनिकों के भेजने की ही बात कही है. कई यूरोपीय देशों भी इस बारे में स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं,

मलेशिया ने भी एक हज़ार सैनिक भेजने का वादा किया है लेकिन उसका भी कहना है कि सैनिकों को वहाँ क्या करना है- यह जानना काफ़ी महत्वपूर्ण है.

शुरुआत

इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में बहुराष्ट्रीय शांति सेना तैनात करने के मुद्दे पर अच्छी शुरुआत हुई है और कई देशों ने सैनिक भेजने का वादा किया है.

लेबनान में व्यापक तबाही हुई है

लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित भी हैं कि वादे के बावजूद वे जिस रूप में बहुराष्ट्रीय सेना चाहते हैं, वैसा हो पाएगा या नहीं.

संयुक्त राष्ट्र स्थित एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में सेना तैनात करने के मामले पर कई एशियाई देशों की ओर से प्रस्ताव आए हैं. जिनमें शामिल हैं- बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और नेपाल.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र यूरोपीय देशों की ओर से ज़्यादा शांति सैनिकों की अपेक्षा कर रहा है और उनमें से भी फ़्रांस से उसे कुछ ज़्यादा ही उम्मीद है.

जर्मनी ने वादा किया है कि वह नौसैनिक कार्य बल भेज सकता है. जबकि कई अन्य यूरोपीय देश उस दिशा-निर्देश का इंतज़ार कर रहे हैं जिसमें सैनिकों के कामकाज के बारे में जानकारी दी जाएगी.

इस बीच दक्षिणी लेबनान में स्थिरता बनाने के लिए सरकारी सेनाएँ पहुँच रही हैं. 40 वर्षों में यह पहली बार है जब सरकारी सेनाएँ दक्षिणी लेबनान में पहुँच रही हैं.

दक्षिणी लेबनान का ज़्यादातर नियंत्रण हिज़्बुल्ला के पास है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में इस बात का ज़िक्र है कि सरकारी सेनाएँ इस इलाक़े का नियंत्रण अपने हाथों में लें.

लेकिन हिज़्बुल्ला का कहना है कि उसके लड़ाके इलाक़े में मौजूद रहेंगे और मज़दूर, विद्यार्थी, इंजीनियर, वकील और डॉक्टरों के रूप में काम करते रहेंगे.

मानवीय सहायता

दूसरी ओर इसराइल ने घोषणा की है कि दक्षिणी लेबनान में अपने नियंत्रण के दो तिहाई इलाक़े से उसकी सेनाएँ हट गईं हैं.

इसराइली सेना दो-तिहाई हिस्से से हटी

लेबनान में युद्ध के कारण हुई भारी तबाही के मद्देनज़र ब्रितानी चैरिटी संस्था ऑक्सफ़ैम ने 20 लाख डॉलर की सहायता राशि की अपील की है.

संगठन का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य साफ़ पानी उपलब्ध कराना और जल निकासी की व्यवस्था करना है.

ऑक्सफ़ैम ने देश के कई हिस्सों में स्थिति को काफ़ी ख़राब बताया है. संगठन का कहना है कि उसने अभी तक 60 हज़ार लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराया है लेकिन वह दो लाख और लोगों तक सहायता पहुँचाना चाहता है.

ऑक्सफ़ैम का कहना है कि प्राथमिक आवश्यकता लोगों को बीमार होने से बचाना है.

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