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लेबनान की नाकेबंदी हटाने से इनकार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान की अपील को दरकिनार करते हुए इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट ने फ़िलहाल लेबनान की नाकेबंदी हटाने से इनकार कर दिया है. कोफ़ी अन्नान से मुलाकात के बाद ओलमर्ट ने कहा कि हिज़्बुल्ला के साथ हुए युद्धविराम की शर्तें पूरी तरह लागू होने के बाद ही नाकेबंदी हटाई जाएगी. ओलमर्ट ने कहा कि दो महत्वपूर्ण शर्तों में से एक थी उन दो इसराइली सैनिकों की रिहाई जिन्हें हिज़्बुल्ला ने पकड़ लिया था. उधर हिज़्बुल्ला के एक कैबिनेट मंत्री ने कहा है कि इसराइली सैनिक बिना शर्त रिहा नहीं किए जाएंगे. लेबनान के ऊर्जा मंत्री मोहम्मद फ्नीश ने बुधवार को कहा कि इसराइली सैनिकों की बिना शर्त रिहाई संभव नहीं है और उन्हें इसराइल की जेलों में बंद लेबनानी क़ैदियों के बदले ही रिहा किया जाएगा. उन्होंने कहा, "यह उसी सिद्धांत के अनुसार है जिस पर हिज़्बुल्ला और प्रतिरोध अमल कर रहा है." ग़ौरतलब है कि लगभग डेढ़ माह पहले हिज़्बुल्ला के साथ लड़ाई शुरु होते ही इसराइल ने लेबनान की हवाई और समुद्री नाकेबंदी कर दी थी. लड़ाई से दक्षिणी लेबनान में हुई तबाही का जायज़ा लेने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इसराइल का दौरा किया कहा कि उनकी कोशिश युद्धविराम को कारगर बनाने की है. कोफ़ी अन्नान ने उम्मीद जताई कि लेबनान में पाँच हज़ार शांति सैनिकों की तैनाती होने के बाद इसराइल अपने सैनिक वापस बुला लेगा. ख़ास उपलब्धि नहीं येरुशलम स्थित बीबीसी संवाददाता जिल मिकगिवरिंग के मुताबिक अन्नान और ओलमर्ट की बातचीत से इस तरह के ठोस संकेत नहीं मिले हैं कि दोनों के बीच मतभेद कम हुए हैं.
अन्नान का कहना है कि नाकेबंदी हटा लेने से एक माह तक चले संघर्ष से उबरने में लेबनान को मदद मिलेगी. लेकिन ओलमर्ट ने सिर्फ़ इतना कहा, "एक बार संयुक्त राष्ट प्रस्ताव संख्या 1701 (युद्धविराम प्रस्ताव) पूरी तरह लागू हो जाए तो इसराइली सेना लेबनान से बाहर निकल जाएगी." ओल्मर्ट ने कहा, "ये प्रस्ताव कोई अलमारी नहीं है जिससे एक सामान निकाला और बाकी को छोड़ दिया." उन्होंने कहा, "जहाँ तक हमारा ताल्लुक है, हम प्रस्ताव के विभिन्न अनुच्छेदों का क्रियान्वयन होने पर नाकेबंदी भी हटा लेंगे." अन्नान ने कहा है कि आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सैनिकों की संख्या दोगुनी कर दी जाएगी. युद्धविराम प्रस्ताव के तहत दक्षिणी लेबनान में 15 हज़ार शांति सैनिकों की तैनाती होनी है. हालाँकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी तक इसकी आधी संख्या के बराबर ही सेना भेजने पर राजी हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें अन्नान ने तबाही का जायज़ा लिया29 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना ओल्मर्ट ने समितियाँ बनाने की घोषणा की28 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना अन्नान की इसराइल-हिज़्बुल्ला से अपील28 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना युद्ध के लिए नसरल्ला ने खेद जताया27 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना शांतिसेना गठन में योगदान का स्वागत26 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना सैनिकों की संख्या पर शिराक के सवाल25 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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