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ईरान के जवाब से अमरीका संतुष्ट नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका का कहना है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की जो पेशकश की है, वह संयुक्त राष्ट्र की माँगों के अनुरुप नहीं है. ग़ौरतलब है कि इस माह के अंत तक यूरोनियम संवर्धन का काम पूरी तरह बंद कर देने पर पश्चिमी देशों ने ईरान को विशेष सहायता पैकेज देने का आश्वासन दिया है. हालाँकि अमरीका ने सबसे पहले अनुसंधान का काम बंद करने को कहा है. चीन और रुस ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मसला बातचीत के ज़रिए ही ढूँढा जाना चाहिए. अग़र ईरान 31 अगस्त की अंतिम समयसीमा तक यूरोनियम संवर्धन का काम नहीं रोकता है तो उसके ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध लगा सकता है. अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रुस, चीन और जर्मनी ने यूरोनियम संवर्धन छोड़ने की शर्त पर ईरान को असैनिक उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक देने की पेशकश की थी. अमरीकी प्रतिक्रिया अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोंजालो गैलेजोस ने कहा, "हम मानते हैं कि ईरान अपने प्रस्ताव को बेहत गंभीर पेशकश मानता है और हम इसकी समीक्षा करेंगे." उन्होंने कहा, "हालाँकि यह रिपोर्ट सुरक्षा परिषद की तय शर्तों पर खड़ा नहीं उतरती है जिसमें सभी परमाणु प्रतिष्ठानों से संवर्धन का काम रोकने की बात कही गई है." फिलिप दोस्ते ब्लेज़ी ने भी कहा कि आगे की बातचीत ईरान के संवर्धन कार्य्रकम रोकने के बाद हो होगी. इस बीच चीन ने कहा है कि वो ईरानी प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है. चीन विदेश मंत्रालय ने कहा, "बातचीत के ज़रिए शांतिपूर्ण समझौता होना चाहिए जो सभी पक्षों का ध्यान रखे." रुस ने भी चीन के रुख का समर्थन किया है | इससे जुड़ी ख़बरें गैस क़ीमत तय करने के लिए सलाहकार04 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस चीन, रूस ने बातचीत की हिमायत की23 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना पश्चिमी देशों के साथ 'गंभीर' बातचीत 22 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा'06 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना ईरान को मिली एक महीने की समयसीमा31 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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