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प्रेमियों का देश...या.. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अब तो आदत सी हो गई है लेकिन 1983 में जब मैं पहली बार लंदन आई थी तो मेरी समझ में नहीं आता था किधर देखूँ. भूमिगत रेल का डब्बा हो, रेलवे स्टेशन का प्लेटफ़ार्म, सड़क, बाज़ार या पार्क जहां देखो वहाँ मुखामुखम. मेरा आशय आप समझ गए होंगे. यानी जहाँ नज़र पड़ती कोई न कोई युवा जोड़ी प्रेम अभिव्यक्ति करती नज़र आती. मेरे लिए यह शायद पहला सांस्कृतिक धक्का था. मेरी समझ में नहीं आता था कि जिस समाज में इतनी व्यक्तिगत आज़ादी है कि कोई किसी के साथ रह सकता है वहां लोगों को खुलेआम अपने प्यार का प्रदर्शन करने की क्या जरूरत है. फिर मैंने पढ़ा कि यूरोपीय देशों में सबसे ज़्यादा तलाक़ ब्रिटेन में होते हैं तो और भी हैरानी हुई. उन युवा जोड़ियों को देख कर तो लगता था कि यह प्रेमियों का देश है. ************************************************************** ऐसी भी क्या पाबंदी.. अँग्रेज़ समय के बड़े पाबंद होते हैं यह हम बचपन से सुनते आ रहे थे. लेकिन इसका मैंने एक बड़ा अजब नमूना देखा. बात तब की है जब मैं बीबीसी के होस्टल में रहा करती थी. यह होस्टल लंदन के केन्द्रीय इलाक़े में है जहाँ दिन-रात रौनक़ रहती है. एक दिन मुझे सूई-धागे की ज़रूरत पड़ी तो मैं हाई स्ट्रीट पहुंची. हाई स्ट्रीट उस मुख्य सड़क को कहते हैं जहाँ दोनों तरफ़ दूकानें होती हैं. कई दूकानों में घुसी लेकिन कहीं सूई-धागा नज़र नहीं आया. वहाँ बड़े-बड़े स्टोर भी थे लेकिन किसी से इतनी छोटी सी चीज़ के लिए पूछते कुछ झिझक महसूस हो रही थी. अंत में एक छोटी सी निजी दूकान दिखाई दी तो सोचा यहाँ सीधे दूकानदार से बात हो जाएगी. जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोलकर एक क़दम अंदर रखा दूकानदार ने आवाज़ दी दूकान बंद हो गई है. मेरे चेहरे पर उलझन देखकर उसने घड़ी की तरफ़ इशारा किया. शाम के साढ़े पाँच बज रहे थे यानी बाज़ार बंद होने का समय. लेकिन समय की ऐसी भी क्या पाबंदी कि आप द्वार पर आए ग्राहक को लौटा दें. ************************************************************* इतनी गर्मी में ही बेहाल अंग्रेज़ी की एक कहावत है कि अंग्रेज़ी मौसम और अँग्रेज़ महिला का कोई भरोसा नहीं. महिलाओं की बात तो पुरुष ही बता सकते हैं लेकिन मौसम की बात हर कोई कर सकता है.
बल्कि यूं कहें कि यहाँ बातचीत का अक्सर यही विषय रहता है. भारत में सुनते थे कि जब इंगलैंड में धूप निकलती है तो स्कूलों की छुट्टी हो जाती है. जी नहीं ऐसा कुछ नहीं होता. यहाँ बारिश भी उतनी नहीं होती जितना सुना था. हाँ हर समय बादल ज़रूर टंगे रहते हैं. और उसका असर लोगों के मूड पर भी पड़ता है. बारिश हो रही हो तो लोग नाक सिकोड़ कर कहेंगे 'ड्रैडफ़ुल डे'. आसमान साफ़ हो धूप खिली हो तो कहते हैं 'लवली डे'. लेकिन इस लवली को दुखदायी बनते देर नहीं लगती. जहाँ तापमान 25-26 डिग्री सैल्सियस से ऊपर हुआ, इनके चेहरे सफ़ेद से गुलाबी हो जाते हैं, तन पर कपड़े घटने लगते हैं, टेलिविज़न पर मौसम का पूर्वानुमान बताने वाले चेतावनी देते हैं कि धूप में जाने से पहले लोशन लगाएँ नहीं तो खाल जल जाएगी, ट्रेनों में घोषणा होती है कि अपने साथ पानी रखें. और बस कुछ ही दिनों में अंग्रेज़ों का हाल बेहाल हो जाता है. सोचती हूं 45-46 डिग्री में इनका क्या हाल होगा. ये डायरी आपको कैसी लगी आप hindi.letters@bbc.co.uk पर अपनी राय भेज सकते हैं. |
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