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मित्तल की व्यस्त भारत यात्रा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोगों को लगा कि स्टील किंग लक्ष्मी निवास मित्तल अबकी बार जन्मभूमि पर कुछ दिन तो टिकेंगे ही. लेकिन वो तो एक ही दिन में निकल लिए. शायद आर्सेलर के बाद किसी और का नंबर लगाने ! जब उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि वो उनसे मिलने दिल्ली नहीं आ सकते तो मित्तल 14 घंटे की उड़ान भर कर अपने 17 सीटों वाले वीपी बीएलए विमान से सीधे भुवनेश्वर पहुँचे. इस यात्रा के लिए उन्होंने कज़ाकिस्तान का अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया. हवाई अड्डे पर उतरते ही लक्ष्मी मित्तल के बेटे आदित्य मित्तल ने कहा कि यहाँ तो बहुत गर्मी है. उनको हवाई अड्डे पर लेने सरकारी गाड़ियाँ भेजी गई थी लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी की गाड़ी से ही राज्य सरकार के सचिवालय जाना तय किया. भुवनेश्वर में दो घंटे बिताने के बाद मित्तल अपने अमले के साथ दिल्ली रवाना हो गए. उनके स्वागत में उनकी औरंगज़ेब रोड स्थिति कोठी पर खासी रौनक थी. लेकिन बहुत व्यस्त चल रहे मित्तल ने वहाँ कुछ घंटे ही बिताए. उन्होंने आर्सेलर के साथ हुए समझौते में भारत की भूमिका के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद दिया. एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और फिर फुर्र हो गए लंदन के लिए. यहाँ तक कि इस बार वो कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर जाने के लिए भी समय नहीं निकाल पाए जहाँ वो अपनी हर भारत यात्रा के दौरान कम से कम एक बार ज़रुर जाया करते थे. ****************************** वीपी बनाम मुलायम जब से विश्ववनाथ प्रताप सिंह की पुस्तक ‘मंज़िल से ज़्यादा सफर’ प्रकाशित हुई है, मुलायम सिंह यादव के बाण उनके लिए कुछ ज़्यादा ही पैने हो गए हैं. जब से 'राजा जी' ने मुलायम के ख़िलाफ रैली की तभी से वह निशाने पर हैं. रैली के बाद मुलायम ने कहा था ‘‘हम जानते हैं दुश्मनों से कैसे निपटा जाता है.’’ ये मात्र गीदड़ भभकी ही नहीं थी. अगले ही दिन वीपी के पुत्र अजय सिंह की इलाहाबाद के सिविल लाइंस इलाके में बन रही करोड़ों रुपए की भवन परियोजना को सील कर दिया गया. इलाहाबाद नगर निगम की टीम बिना किसी पूर्व सूचना के निर्माण स्थल पर पहुँची और उसे सील करने का फ़रमान सुना दिया. ये अलग बात है कि अजय ने अदालत से स्टे ऑर्डर ले लिया. ये वही अजय सिंह हैं जिन्हें सेंट किट्स मामले में धोखे से फँसाया गया था. ******************************* सलाहकार परिषद पर सवाल सोनिया गाँधी के जाने के बाद लगता है राष्ट्रीय सलाहकार परिषद यानी एनएसी को ग्रहण सा लग गया है. एक के बाद एक इसके कई सदस्य निराश होकर इस प्रतिष्ठित परिषद से अपना पिंड छुड़ा रहे हैं.
पहले सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और अर्थशास्त्री जॉ ड्रेज गए और अब ‘लोकसत्ता’ के संस्थापक जय प्रकाश नारायण ने एनएसी से इस्तीफ़ा दे दिया है. सोनिया गाँधी के अध्यक्ष काल में एनएसी को एक ख़ास दर्ज़ा मिला हुआ था और उसे एक महत्वपूर्ण थिंक टैंक माना जाता था लेकिन अब इसकी महत्ता समाप्त होती दिख रही है. जय प्रकाश नारायण ने उस समय इस्तीफ़ा दिया था जब एनएसी के कार्यकाल को छह महीनों के लिए और बढ़ाया गया था. सोनिया गाँधी ने लाभ के पद पर उठे विवाद के बाद इसकी अध्यक्षता और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था. अब वो रायबरेली से लोकसभा का चुनाव जीत कर आ गई है. इसलिए उनपर दबाव है कि वो दोबारा इसकी अध्यक्ष बन जाएँ लेकिन सोनिया गाँधी जल्दबाज़ी में कोई क़दम नहीं उठाना चाहती. ***************************** चावला पर खींचतान आख़िर क्या वजह है कि विपक्ष नवीन चावला को निर्वाचन सदन से बाहर देखना चाहता है और काँग्रेस उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास कर रही है. नवीन चावला उस समय से गाँधी परिवार को जानते हैं जब सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी की शादी हुई थी. उस समय वो दिल्ली में अतिरिक्त ज़िला दंडाधिकारी होते थे और राजीव सोनिया की शादी का रजिस्ट्रेशन उनके यहाँ ही हुआ था. आपातकाल के दौरान भी नवीन चावला की खूब चलती थी और विपक्ष के कई नेता उस दौरान अपनी गिरफ़्तारी के लिए उन्हें ज़िम्मेदार मानते हैं. (हमारी साप्ताहिक दिल्ली डायरी का यह अंक आपको कैसा लगा? लिखिए hindi.letters@bbc.co.uk पर). | इससे जुड़ी ख़बरें मित्तल के स्वागत में पढ़े गए क़सीदे07 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अभी तो दिल भरा नहीं...18 जून, 2006 | भारत और पड़ोस टमाटर ने सरकार को टेंशन में डाला 25 जून, 2006 | भारत और पड़ोस महंगाई पर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों की बैठक05 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस सोनिया ने साधा मुलायम पर निशाना 17 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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