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टमाटर ने सरकार को टेंशन में डाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैसे तो दिल्ली में हर वक्त राजनीति के दांवपेंच की चर्चा चलती रहती है, लेकिन आजकल सत्ता के गलियारों में टमाटर छाया हुआ है. इस टमाटर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री चिदंबरम और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तक की नाक में दम कर रखा है. इस समय दिल्ली में टमाटर 40 रुपए प्रति किलो बिक रहा है और महंगाई का प्रतीक बन गया है. आपको याद होगा कि प्याज के दामों ने देश में सत्ता परिवर्तन तक करा दिया है. यूपीए सरकार इतिहास के इस सबक को याद कर परेशान है. अब आलम यह है कि टीवी चैनलों के लगभग हर बुलेटिन में आपको सब्जी मंडी का एक दृश्य अवश्य नज़र आएगा और उसमें टमाटर प्रमुखता से दिखाई देगा. और तो और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित फीता काटने के बजाए आजकल किसी सरकारी स्टॉल पर 20 रुपए प्रति किलो टमाटर बेचने का शुभारंभ करती नज़र आ रही हैं. इस सब पर एक नेता की टिप्पणी थी कि जिस तरह टमाटर के दिन फिरे वैसे सभी के फिरें. ********************************* अटल के गुर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने बयानों के लिए जाने जाते हैं. बताते हैं कि जवाहरलाल नेहरू भी उनकी भाषण कला से प्रभावित होकर उनकी पीठ थपथपाई थी. माना जाता है कि उन्हें प्याले में तूफान खड़ा करने का गुर मालूम है. उनके पिछले कुछ बयानों को याद करें तो उन्होंने दिवंगत प्रमोद महाजन को लक्ष्मण करार देकर पार्टी के अगली पंक्ति के नेताओं की धड़कने बढ़ा दी थीं. तो कभी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा की हार का ज़िम्मेदार ठहराकर संघ परिवार में भूचाल ला दिया था. अब उन्होंने भाजपा नेताओं को सलाह दी है कि वे कम्युनिस्टों से सत्ता में बने रहने के गुर सीखें.यह बात जगजाहिर है कि भाजपा और कम्युनिस्टों में छत्तीस का आंकडा है. हालत यह है कि एक पार्टी दिन कहे तो दूसरी उसे रात बताती है. ऐसे में अटल की सलाह भाजपा के कई लोगों को नागवार गुजरी है. ************************* और अब लालू चारा रेल मंत्री लालू यादव इन दिनों छाए हुए हैं. उन्होंने रेल मंत्रालय की कायापलट कर दी है. जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढोत्तरी को लेकर हायतौबा मची हुई थी, उस दौरान रेल मंत्रालय ने मालभाड़े में कटौती की. साथ ही पहली बार ऐसा हुआ कि रेल बजट में रेल भाड़े में कटौती की गई.
विज्ञापन की भाषा बोलें तो लालू भारतीय बाज़ार में स्थापित ब्रांडों में से एक है. इसका फायदा लोग उठाने से नहीं चूकते. उनके नाम पर एक फ़िल्म पद्श्री लालू प्रसाद यादव बन चुकी है. उनके लहजे में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का कैचअप का विज्ञापन अक्सर टीवी पर नज़र आता है. बिहार में तो लालू गुडिया, लालू टाफी, लालू सत्तू और लालू प्रसाधन सामग्री हाथोंहाथ बिक रही है. और अब एक कंपनी ने लालू चारा नाम से एक पशु आहार बाज़ार में उतारा है. कंपनी के मालिक का कहना है कि उनके ब्रांड का चारा घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है, वो कारोबारी हैं और इससे बेहतर पशु चारे का नाम हो नहीं सकता था. (हमारी साप्ताहिक दिल्ली डायरी का यह अंक आपको कैसा लगा? लिखिए hindi.letters@bbc.co.uk पर). |
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