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मतभेद सुलझाने के लिए प्रयास जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों के मुद्दे पर विभिन्न देशों के बीच मतभेद सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण के मसले के लिए नियुक्त अमरीकी दूत बेजिंग के अघोषित दौरे पर चले गए हैं. वहीं अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस ने उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों का जवाब देने के लिए लाए जानेवाले प्रस्ताव को नर्म बनाए जाने के चीन के सुझाव को ठुकरा दिया है. चीन ने इस संबंध में एक बयान जारी किए जाने का सुझाव दिया है. इसमें उत्तर कोरिया के पिछले सप्ताह किए गए मिसाइल परीक्षणों की निंदा तो की गई है लेकिन उसमें प्रतिबंधों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र परिषद के सदस्यों के बीच उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी प्रस्ताव के मसौदे पर होने वाले मतदान को तत्काल नहीं कराए जाने पर सहमति हुई. संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा कि मतदान बाद में कराने का फ़ैसला इसलिए किया गया ताकि इस संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के लिए चीन की ओर से हो रही कोशिशों का साथ दिया जा सके. चीन के एक वरिष्ठ परमाणु वार्ताकार उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुँचे गए हैं. जॉन बोल्टन ने कहा," प्रस्ताव पेश करनेवाले देशों की बैठक हुई जिसमें यह तय हुआ कि हम आज इस पर मतदान कराने के लिए दबाव नहीं डालेंगे. हम समझते हैं कि अभी सारा ध्यान उत्तर कोरिया के रवैए पर दिया जाए और वहाँ गए चीन के दल की भी सहायता की जाए." दूसरी ओर अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि उत्तर कोरिया को कड़ा संदेश दिए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा," जो देश ये प्रस्ताव लाए हैं, वे मानते हैं कि उत्तर कोरिया को यह संदेश दिए जाने की ज़रूरत है कि वह जो कर रहा है वो विनाशकारी है. लेकिन हमें लगता है कि उत्तर कोरिया में चीन का दल जो प्रयास कर रहा है उसे थोड़ा समय दिया जाना चाहिए." मतभेद वैसे उत्तर कोरिया के मामले पर सुरक्षा परिषद में मतभेद और मुखर होते जा रहे हैं. चीन और रूस का मानना है कि मौजूदा परिस्थिति में उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से प्रस्ताव पारित करवाना ग़ैरज़िम्मेदाराना और नकारात्मक क़दम होगा. संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग गोन या ने कहा है कि उनका देश इस प्रस्ताव से बेहद चिंतित है क्योंकि इससे उत्तर कोरिया के विरूद्ध सैनिक कार्रवाई का रास्ता तैयार हो सकता है. उन्होंने कहा," मैं समझता हूँ कि जिन्हें सुरक्षा परिषद की स्थिति पता है वे ये बख़ूबी समझते हैं कि जिस प्रस्ताव की बात हो रही है उसके न केवल चीन बल्कि अन्य देशों के लिए भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं." चीनी राजदूत का कहना था कि वे ऐसा मानते हैं कि फ़िलहाल बेहतर यह होगा कि सुरक्षा परिषद एक बयान जारी करे जिसमें उत्तर कोरिया से कहा जाए कि वह बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास बंद करे और आगे कोई परीक्षण न करे. चीन ने जिस बयान का ख़ाका तैयार किया है उसमें सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों से भी यह अनुरोध किए जाने की बात है कि वे ऐसी तकनीक या सामग्रियाँ न बेचें जिनका इस्तेमाल उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों में हो सकता है. लेकिन चीन के इस बयान को अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस बहुत कमज़ोर बता रहे हैं और विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो क़ानूनी रूप से बाध्य करनेवाला हो. तीनों देश मानते हैं कि मिसाइलों का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है इसलिए या तो कोई और कड़ा बयान जारी किया जाए या फिर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने पर विचार हो. |
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