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बात नहीं करना चाहते बीस्टन के लोग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की यॉर्कशर काउंटी में स्थित लीड्स शहर....लंदन में पिछले साल तीन भूमिगत ट्रेनों और एक बस में विस्फोट करनेवाले चार आत्मघाती बम हमलावरों में से तीन इसी शहर में रहते थे. लंदन से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित शहर का एक ख़ास इलाक़ा है बीस्टन, जो एक मुस्लिम बहुल इलाक़ा माना जाता है. दो हमलावर यहीं रहते थे.लेकिन बीस्टनवासियों ने एक तरह से इस बारे में चुप्पी साध रखी है. सब कहते हैं बात करनी है तो हमारा सेंटर जाओ,बीस्टन का कम्युनिटी सेंटर, वहाँ पर लोग बात करेंगे. लेकिन मैं जब हमारा सेंटर पहुँचा तो वहाँ दरवाज़े के बीचो-बीच एक नोटिस चिपका था जिसमें लिखा था कि हम मीडिया को कोई बयान नहीं देना चाहते इसलिए मीडिया के लोग कृपया हमें परेशान ना करें. मीडिया से नाराज़गी लेकिन मैंने कोशिश जारी रखी.जगह-जगह घूमा, जिससे भी निगाह मिलती, वो समझ जाता कि मैं बाहर से आया हूँ, निगाहों में संदेह दिखता. फिर मुझे एक चौराहे पर एक पाकिस्तानी मूल का युवक मिला, सज्जाद, जो बात करने के लिए तैयार हो गया लेकिन उर्दू जानते हुए भी उसने उर्दू में बात नहीं की. सज्जाद ने बताया,"यहाँ पिछले एक साल में केवल यही बदलाव हुआ है कि मीडियावालों की भीड़ बढ़ गई है जिससे हम परेशान हैं. लोग कुछ देर के लिए आते हैं और कुछ लोगों से बात कर कहते हैं कि वहाँ लोगों के बीच तनाव है जो सही नहीं है." लेकिन सज्जाद ने जो बात कही उससे दूसरे लोग सहमत नहीं थे...एक बुज़ुर्ग गोरे व्यक्ति से बात हुई तो उन्होंने कहा कि ये जगह बहुत बदल गई है.मगर उन्होंने आवाज़ रिकॉर्ड करवाने से मना कर दिया. पर कुछ गोरे युवक-युवती माइक पर बात करने के लिए तैयार हो गए. रेचेल और उसके दोस्तों का कहना था कि यहाँ लोगों में काफ़ी दुराव आ गया है, पुराने रिश्ते टूटते जा रहे हैं, भरोसा नहीं रहा. हमलावरों के रिश्तेदार मैंने बम हमलावरों के रिश्तेदारों से भी मिलने की एक नाकाम कोशिश की.हुआ केवल ये कि मैं एक हमलावर शहज़ाद तनवीर के ममेरे भाई से फो़न पर बात कर सका. उनकी आवाज़ में मीडिया के प्रति गु़स्सा झलक रहा था.मैंने कोई 10 मिनट उनसे फ़ोन पर बात की. आख़िर में उन्होंने कहा कि वे लोग बीस्टन छोड़ चुके हैं,इसलिए मैं किसी से नहीं मिल सकता. मगर लीड्स के पहले एशियाई मेयर मोहम्मद इक़बाल ने बताया,"वो सब लोग वहीं रह रहे हैं जहाँ थे, लेकिन वो परेशान हैं इसलिए कोई बात नहीं करना चाहते." संदेह बीस्टन की हवा में एक बात जो क़दम रखते ही महसूस होती है, वो है संदेह का वातावरण, चाहे वो मीडिया के लिए हमारा सेंटर पर लगा नोटिस हो, चाहे शहज़ाद के भाई का ये कहना कि हम घर छोड़ चुके हैं, या फिर सज्जाद का ये कहना कि सबकुछ सामान्य है...सारी बातें एक शक भरा माहौल बनाती हैं. पता पूछने के ही दरम्यान मुझे एक 16-17 साल का लड़का भी मिला जिसकी हाथ में सिगरेट था. पहले उसने मुझसे लाइटर माँगी जो मैं नहीं रखता. फिर उसने पूछा कि मुझे क्या यहाँ अकेले आकर डर नहीं लगता.मैंने कहा नहीं. फिर उसने मुझसे पूछा कि अगर वो मुझे कुछ बताएगा तो क्या मैं उसे पैसे दूँगा. मैंने कहा नहीं और फिर उससे पूछा कि क्या वो पढ़ाई करता है. उसने कहा, नहीं मैं बिज़नेस करता हूँ. लेकिन उसकी उम्र ने इस बात को भी संदेह के ही दायरे में डाल दिया. फिर मैं आगे बढ़ गया ये सोचता हुआ कि शायद पैसे देता तो मेरा कुछ काम हो जाता. और ये भी कि शायद कोई और भी पैसे देता तो उसका भी काम हो जाता...काम चाहे जो भी हो. |
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