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शुक्रवार, 07 जुलाई, 2006 को 09:00 GMT तक के समाचार
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'घाव भरेगा मगर दाग़ तो रहेगा ही'

मोहम्मद इक़बाल
मोहम्मद इक़बाल लीड्स शहर के मेयर बननेवाले पहले एशियाई व्यक्ति हैं
सात जुलाई, 2005 को लंदन में हुए बम धमाकों में शामिल चार हमलावरों में से तीन हमलावर लंदन से लगभग 300 किलोमीटर दूर उत्तर स्थित शहर लीड्स के रहनेवाले थे.

लीड्स का नाम तबसे लगातार चर्चा में रहा है. लंदन बम धमाकों से जुड़ना शहर के लिए ये एक दिल दुखानेवाली घटना थी.

पिछले एक साल में लीड्स में रहनेवालों की ज़िंदगी काफ़ी-कुछ बदली है.

इन्हीं बदलावों में से एक बदलाव ये हुआ कि पहली बार इस वर्ष किसी एशियाई व्यक्ति, मोहम्मद इक़बाल, को लीड्स का मेयर चुना गया.

लंदन बम धमाकों में लिप्त तीनों बम हमलावर लीड्स के जिस इलाक़े के थे, मोहम्मद इक़बाल लेबर पार्टी की तरफ़ से उसी क्षेत्र से लीड्स काउंसिल के लिए निर्वाचित हुए हैं.

मेयर इक़बाल कहते हैं,"देखिए हक़ीक़त ये है कि जो घाव साल भर लगा था वो भरेगा ज़रूर लेकिन उसका दाग तो रहेगा ही...लेकिन हमें समय के साथ आगे बढ़ना है".

"हम उस हमले की तब भी भर्त्सना करते थे, अब भी करते हैं, निर्दोष लोगों को मारना ग़ैर इस्लामिक कृत्य है".

ज़िम्मेदारी

 हम सब ज़िम्मेदार हैं, जो माता-पिता हैं उनकी भी ज़िम्मेदारी है, धार्मिक नेताओं की भी ज़िम्मेदारी है और सरकार की भी ज़िम्मेदारी है
मोहम्मद इक़बाल, मेयर, लीड्स काउंसिल

मेयर इक़बाल का कहना है कि सात जुलाई के जैसी स्थिति के लिए समुदाय भी ज़िम्मेदार है और सरकार भी.

वे कहते हैं,"जो समझदार लोग हैं वो ये कहते हैं कि ये कुछ लोगों का काम था और इसके लिए सारे समुदाय को दोषी नहीं माना जा सकता".

"हम सब ज़िम्मेदार हैं, जो माता-पिता हैं उनकी भी ज़िम्मेदारी है, धार्मिक नेताओं की भी ज़िम्मेदारी है और सरकार की भी ज़िम्मेदारी है".

"सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ब्रिटेन की विदेश नीति के कारण ये आत्मघाती बम हमले हुए..लेकिन अगर मतभेद हैं तो इसका मतलब ये तो नहीं कि निर्दोष लोगों को मारा जाए".

पहले एशियाई मेयर

 मैं अपने समुदाय के सामने एक रोल मॉडल रखना चाहता था कि अगर आपमें निष्ठा है तो आपको कामयाबी तक पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता
मोहम्मद इक़बाल

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से आए 44 वर्षीय मोहम्मद इक़बाल फ़िलहाल लीड्स के मेयर हैं.

आठ साल की उम्र में माता-पिता के साथ लीड्स आए इक़बाल ने मेयर की कुर्सी तक पहुँचने से पहले 15 वर्षों तक शहर में टैक्सी चलाई है.

कुछ प्रेक्षकों का मत ये है कि मोहम्मद इक़बाल को मेयर की कुर्सी दिया जाना सात जुलाई को हुए हमले से हुए नुक़सान की भरपाई करने का एक प्रयास है.

मोहम्मद इक़बाल सीधे-सीधे तो ये नहीं मानते लेकिन इतना अवश्य कहते हैं कि सात जुलाई की घटना ने उनका मन बदला और उन्होंने ज़िम्मेदारी लेने की कोशिश की.

वे बताते हैं,"मेरी पार्टी से एक महिला उम्मीदवार का नाम तय माना जा रहा था, लेकिन जब सात जुलाई का हादसा हुआ तो मैंने अपने नेताओं से कहा कि मैं अपने समुदाय के लिए काम करने के लिए ये दायित्व उठाना चाहता हूँ".

"मैं अपने समुदाय के सामने एक रोल मॉडल रखना चाहता था कि अगर आपमें निष्ठा है तो आपको कामयाबी तक पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता".

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