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शनिवार, 10 जून, 2006 को 12:32 GMT तक के समाचार
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ज़रक़ावी के शहर ज़रक़ा में मायूसी
ज़ार्का शहर
ज़रकावी के शहर में कोई भी जल्दी उनके बारे में बात नहीं कर रहा है
इराक़ में सक्रिय रहे जार्डन के चरमपंथी अबू मुसाब अल ज़रकावी के पैतृक शहर ज़रक़ा में अजीब सी मायूसी छायी हुई है जहां लोग अब भी ज़रकावी की मौत पर यक़ीन नहीं कर पा रहे हैं.

शुरुआत में ज़रकावी के परिवार वालों ने इस ख़बर पर भरोसा ही नहीं किया था कि ज़रकावी अमरीकी बमबारी में मारे गए हैं.

ज़रकावी के दो मंज़िला सामान्य से घर में उनकी पत्नी और चार बच्चे अब भी रहते हैं जहां उनके क़रीबी रिश्तेदारों और दोस्तों का आना-जाना अभी भी लगा हुआ है.

ज़रकावी के एक संबंधी ने बीबीसी को बताया कि जब तक अल क़ायदा ने ज़रकावी की मौत की पुष्टि नहीं की तब तक परिवार यह बात मानने को तैयार नहीं था कि ज़रकावी मारे गए हैं.

लेकिन इस शहर में और ख़ासकर ज़रकावी के घर के पास मीडियाकर्मियों का कोई स्वागत नहीं हो रहा है. जब कुछ पत्रकारों ने ज़रकावी के घर का रुख़ किया तो उन पर पत्थर फेंके गए और उनके कैमरों को निशाना बनाया गया.

ज़रक़ा शहर
ज़रकावी के घर के पास जाने वाले पत्रकारों पर पत्थर फेंके गए

इस घर के आसपास जार्डन की खुफिया पुलिस भी फैली हुई है और लोगों पर नज़र रख रही है.

ज़रकावी के परिवार के एक सदस्य से साक्षात्कार करने वाले अल जज़ीरा टेलीविज़न के एक पत्रकार को गिरफ़्तार भी किया गया है.

ज़रकावी से कुछ दिनों पहले इराक़ में मुलाक़ात करने वाले उनके परिवार के एक सदस्य पहले बीबीसी से बात करने को तैयार हुए लेकिन फिर उन्होंने यह कहते हुए इंटरव्यू नहीं दिया कि ऐसा करने से जार्डन की खुफिया पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर सकती है.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि अल क़ायदा ने जब ज़रकावी की मौत की पुष्टि कर दी तो उनके घर के पास कई पुरुष और जवान लड़के पहुंचे और पास की ज़मीन को साफ कर के एक बैनर लगाया जिस पर लिखा था "शहीद अबू ज़रकावी."

ज़रकावी के घर से अलग ज़रक़ा में लोग भी उस व्यक्ति के बारे में बात करने से कतरा रहे हैं जिसके नाम का ही मतलब ज़रक़ा का निवासी यानी ज़रकावी.

जिन लोगों ने ज़रकावी के बारे में बात की उनका मानना था कि इराक़ में अमरीका और ब्रिटेन ने क़ब्ज़ा कर रखा है और इसके विरोध में संघर्ष सही है.

शहर के एक मेडिकल छात्र का कहना था कि ज़रकावी एक सच्चा संघर्ष कर रहे थे. मूसा नाम के एक अन्य व्यक्ति ने ज़रकावी को महान योद्धा क़रार दिया.

हालांकि ज़रक़ा के बाहर अन्य शहरों में कई ऐसे भी लोग मिले जिनका यह कहना था कि जॉर्डन में हमले करवाने के बाद ज़रकावी के प्रति उनका प्रेम भाव घृणा में बदल गया.

पिछले साल जार्डन की राजधानी अम्मान के होटलों में तीन बम हमले हुए थे जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए थे.

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