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भूकंप का आँखों देखा हाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया समयानुसार सुबह पाँच बजकर 55 मिनट का वक़्त था, मैं अपने घर पर ही था कि ज़बरदस्त भूकंप आया. भूकंप इतना ज़बरदस्त था मैं खड़ा नहीं हो पा रहा था. मैं अपने परिवारवालों को घर से बाहर लाने के लिए भागा. ऐसा लग रहा था कि पूरा घर हमारे ऊपर गिर जाएगा. मैं अपने पड़ोसियों की चीख पुखार सुन सकता था. सुरक्षित बाहर आने के एक मिनट बाद तक भी झटके महसूस किए जा सकते थे. मैं योगजकार्ता में रहता हूँ. यहाँ पास ही में माउंट मेरापी ज्वालामुखी है जिसमें कई दिनों से हलचल हो रही है और लावा निकल रहा है. मेरे दिमाग़ में पहली बात यही आई कि शायद ज्वालामुखी में बड़ा विस्फोट हुआ है. लेकिन ऐसा नहीं था. विशेषज्ञों का कहना है कि इस भूकंप का ज्वालामुखी से कोई लेना देना नहीं है. लेकिन भूकंप के चलते ज्वालामुखी में कई बिंदु खुल गए हैं जहाँ से गर्म गैस और राख निकल रही है. भूकंप आने के बाद लोगों ने ज्वालामुखी से गैस निकलते देखी. लोग काफ़ी डरे हुए हैं और घर वापस नहीं जा रहे. लोगों ने सड़कों के किनारे दरियाँ बिछा रखी हैं और वहीँ सो रहे हैं. योगजकार्ता के दक्षिण में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है- हिंद महासागर की ओर जहाँ माना जा रहा है कि भूकंप का केंद्र है. कई लोगों का इलाज सड़क किनारे ही किया जा रहा है. घायलों की संख्या इतनी ज़्यादा है कि उनका इलाज अस्पतालों के पार्किंग वाले इलाक़े में ही रखकर किया जा रहा है. |
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