|
सूनामी चेतावनी प्रणाली का परीक्षण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रशांत महासागर के आसपास के 30 से अधिक देशों ने एक ऐसी प्रणाली का परीक्षण किया है जो सूनामी आने की स्थिति में चेतावनी दे सकेगी. ये परीक्षण हवाई में सूनामी चेतावनी केंद्र से सूनामी की एक नक़ली चेतावनी जारी करके किया गया. इसके लिए चिली के समुद्र तट पर एक ऐसे भूकंप की कल्पना की गई थी जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9.2 थी और जिसकी वजह से पूरा पूर्वी प्रशांत महासागर सूनामी की चपेट में आ गया था. इस परीक्षण के बाद अब सरकारों को रिपोर्ट देनी है कि उन्हें सूनामी की चेतावनी कितनी तत्परता से मिली थी. इस सूचना प्रणाली को मौसम की सूचना देने वाली तकनीक के अलावा ई-मेल और फ़ैक्स से भी जोड़ा गया है. सूनामी परीक्षण प्रणाली को लेकर इन देशों की रुचि दिसंबर, 2004 में आए सूनामी के बाद जागी है जिसमें कई देश प्रभावित हुए थे और कोई दो लाख लोगों की मौत हो गई थी. मॉडल जैसे ही परीक्षण शुरू हुआ हवाई के ईवा तट पर बीप-बीप की आवाज़ गूँजने लगी और इसी समय ये चेतावनी दूसरे देशों में भी पहुँच गई. चेतावनी केंद्र के निदेशक चार्ल्स मैकक्रेरी का कहना है, "सभी देशों ने इसे लेकर जिस तरह की उत्सुकता दिखाई उससे हमें लग रहा था कि परीक्षण से पहले ही ये प्रणाली सफल हो गई." "सहयोग की जैसी भावना इस देशों में दिखाई दी ऐसा हमने पहले कहीं नहीं देखा था." वैसे तो प्रशांत महासागर में सूनामी चेतावनी प्रणाली 1965 से लगी हुई है लेकिन ये अब तक का सबसे बड़ा परीक्षण है. इस परीक्षण से भारतीय महासागर में सूनामी चेतावनी प्रणाली का मॉडल विकसित करने में सहायता मिल सकती है. वैसे जब ये परीक्षण किया जा रहा था तभी दो वास्तविक भूकंप आने की ख़बरें मिलीं. एक न्यूज़ीलैंड के उत्तरी भाग में था, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.4 थी और दूसरा इंडोनेशिया में आया जिसकी तीव्रता 6.8 मापी गई. दोनों से किसी जानमाल की हानि की सूचना नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें सूनामी की बरसी पर प्रार्थना26 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना धीरे धीरे पटरी पर लौट रही है जिंदगी22 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस चेतावनी प्रणाली बनाने की दिशा में प्रगति14 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी चेतावनी प्रणाली पर काम तेज़26 जून, 2005 | पहला पन्ना क्यों नहीं आई सूनामी लहरें29 मार्च, 2005 | पहला पन्ना सूनामी से बड़ी प्राकृतिक आपदाएं30 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||