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रविवार, 26 जून, 2005 को 01:48 GMT तक के समाचार
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सूनामी चेतावनी प्रणाली पर काम तेज़
सूनामी टावर
सूनामी की चेतावनी देने के लिए आधुनिक संचार उपकरण लगाए जा रहे हैं
सूनामी की तबाही के छह महीने पूरे हो चुके हैं.

तबाह हुए मकान, बेघर लोग अपनी ज़िंदगी के छोटे-छोटे टुकड़ों को दोबारा समेटने की कोशिश में जुटे हैं. इसके साथ ही कोशिश चल रही है हिंद महासागर में सूनामी चेतावनी प्रणाली लगाने की.

चेतावनी प्रणाली लगाने का काम अभी बहुत बाक़ी है लेकिन इसमें लगे लोगों को आशा है कि भविष्य में जान-माल की बर्बादी को रोकने में यह प्रणाली अहम भूमिका निभाएगी.

चेतावनी प्रणाली लगाने के काम में जुटे ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधि रॉबर्ट ओवेन जोंस कहते हैं, "हमने बहुत काम किया है, हमने नक्शा तैयार कर लिया है, हमारे पास प्रणाली लगाने के लिए पैसा भी है, स्थिति पहले से बहुत अलग है."

प्रणाली

सूनामी चेतावनी प्रणाली एक दो स्तरीय प्रणाली होगी जिसमें समुद्र के भीतर एक अत्याधुनिक सेंसर लगाया जाएगा जो समुद्री की सतह पर होने वाली हलचल के बारे में जानकारी एक उपग्रह को भेजेगा.

सूनामी सायरन
सूनामी की चेतावनी देने के लिए थाइलैंड में सायरन लगाए जा रहे हैं

लेकिन इतने भर से काम पूरा नहीं होता, तटीय इलाक़ों में रहने वाले लाख़ों-लाख लोगों को आख़िर किस तरह समय रहते चेतावनी के बारे में पता चलेगा, यह एक अहम सवाल है.

इसके लिए एक सामुदायिक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही है ताकि लोग तेज़ी से चेतवानी को पूरे तटीय क्षेत्र में फैला सकें.

समुद्र के भीतर सेंसर लगाने का काम तो संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की तकनीकी टीम कर रही है जबकि सामुदायिक नेटवर्क बनाने का काम अलग-अलग देशों की सरकारें रेड क्रीसेंट की मदद से कर रही हैं.

अभी ये काम योजना के स्तर पर ही हैं, इसी सप्ताह पेरिस में यूनेस्को की एक बैठक हो रही है जिसमें हिंद महासागर के किनारे बसे 27 देशों को सूनामी चेतावनी प्रणाली के बारे में जानकारी दी जाएगी.

सभी देशों को अपने यहाँ सूनामी चेतावनी केंद्र की स्थापना करनी होगी जहाँ समुद्री हलचलों के बारे में लगातार जानकारियाँ आती रहेंगी, इन केंद्रों की स्थापना का काम कई देशों में शुरू भी हो चुका है.

आशा की जा रही है कि 2006 तक प्रणाली पूरी तरह से काम करने लगेगी, रॉबर्ट ओवेन जोंस कहते हैं, "सूनामी प्रणाली को लेकर सहायता करने वाले देशों का रूख़ बहुत अच्छा है, अब तक सब कुछ अच्छा चल रहा है."

इस प्रणाली पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि जनता का रूख़ भी बहुत बदला हुआ है, वे अब समझने लगे हैं कि मामला कितना गंभीर है.

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