|
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के कुछ प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों के बीच चर्चा हुई है कि ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम के संवेदनशील मुद्दों को छोड़ने के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जाए. इस बातचीत में सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों के अलावा जर्मनी और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस बातचीत की अध्यक्षता अमरीका की विदेश मंत्री कोंडीलीज़ा राइस ने की. बैठक के बाद फ़्रांस के विदेश मंत्री बताया कि सब इस बात पर सहमत थे कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव ज़रूरी है. लेकिन अमरीकी विदेश विभाग ने कहा कि इस सप्ताह प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद कम है. इसके पहले अमरीकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को लिखे पत्र से परमाणु विवाद सुलझनेवाला नहीं है. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलिज़ा राइस ने इस पत्र से कोई कूटनीतिक रास्ता निकलने की संभावना से इनकार किया है. ग़ौरतलब है कि सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने अमरीकी राष्ट्रपति बुश को पत्र लिखकर 'मौजूदा स्थिति' के हल के लिए प्रस्ताव भेजा था. अमरीका और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों के बीच पिछले 27 सालों में यह पहला आधिकारिक संपर्क है. अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि 18 पन्नों का यह पत्र लक्ष्यहीन है जिसमें बिना किसी मतलब के बहुत कुछ कहा गया है. अमरीका का कहना है कि यह पत्र न तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को ही दूर करता है और न ही ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड और चरमपंथी गुटों को समर्थन देने के अमरीका के आरोपों के बारे में ही कुछ कहता है. टकराव का मुद्दा न्यूयॉर्क से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस पत्र पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थाई सदस्य और जर्मनी विचार करेंगे जो जल्दी ही एक बैठक करने वाले हैं.
हालांकि अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलिज़ा राइस ने कहा कि ईरान के परमाणु मुद्दे पर बातचीत की शुरुआत शायद ही इस पत्र से हो. पिछले कुछ समय से अमरीका ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद के देशों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है ताकि ईरान पर प्रतिबंध लगाए जा सकें. सुरक्षा परिषद के सदस्य रूस और चीन लगातार ईरान पर किसी प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं. अमरीका के नेतृत्व में पश्चिमी देश ये कोशिश कर रहे हैं कि ईरान के परमाणु मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित कराया जाए ताकि ईरान अगर यूरेनियम संवर्द्धन जारी रखता है, तो उसके ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाए जाएं. हालाँकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.लेकिन अमरीका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश के नाम अहमदीनेजाद की चिट्ठी 08 मई, 2006 | पहला पन्ना ईरान की संसद ने दी धमकी07 मई, 2006 | पहला पन्ना ईरान मसले पर सुरक्षा परिषद में मतभेद06 मई, 2006 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के मसौदे की आलोचना06 मई, 2006 | पहला पन्ना 'टकराव की ओर बढ़ रहे हैं पश्चिमी देश'04 मई, 2006 | पहला पन्ना सुरक्षा परिषद में ईरान पर चर्चा03 मई, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने कहा प्रतिबंधों का ख़तरा नहीं02 मई, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा'29 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||