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'ईरान ने परमाणु संवर्द्धन बंद नहीं किया' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान ने शुक्रवार की तय समयसीमा तक यूरेनियम संवर्द्वन का काम बंद नहीं किया है. आईएईए के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि परमाणु कार्यक्रम के मकसद से जुड़े सवालों का जबाव देने में ईरान ने कुछ ख़ास सहयोग नहीं किया. आईएईए प्रमुख ने कहा है कि ईरान ने ये पता लगाने में संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं से सहयोग भी नहीं किया कि उसने यूरेनियम संवर्द्धन का काम रोका या नहीं. उल्लेखनीय है कि अमरीका और कुछ यूरोपीय देशों को अंदेशा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है और इसके चलते संयुक्त राष्ट्र चाहता था कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे.
लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है और वह किसी दबाव में इसे नहीं रोकेगा. विवादों के बीच यह मामला सुरक्षा परिषद को भेज दिया गया था. हालांकि अल बारादेई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान इस मसले पर बात करना चाहता है, लेकिन उनकी रिपोर्ट आने से पहले ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा था कि उसे संयुक्त राष्ट्र के किसी प्रस्ताव की कोई परवाह नहीं है. अमरीका की प्रतिक्रिया आईएईए की रिपोर्ट पर अमरीका के राष्ट्रपति बुश ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान का यह हठ उन्हे स्वीकार्य नहीं है और अमरीका इस मसले पर अपने सहयोगियों से बातचीत करता रहेगा. वहीं संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा कि आईएईए की रिपोर्ट इस बात का सुबूत है कि परमाणु हथियार बनाने की दिशा में ईरान ने अपने प्रयास तेज़ कर दिए हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से संकेत मिल रहे थे ईरान को लेकर आईएईए कि रिपोर्ट सकारात्मक नहीं होगी. इसके चलते ईरान की बयानबाज़ी तेज़ हुई है. अमरीका ईरान के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए समर्थन जुटा रहा है. अमरीका की विदेश मंत्री कॉंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की साख दाँव पर लगी है. प्रतिबंध बीबीसी संवाददाता पॉल रेनॉल्डस का कहना है कि अब सुरक्षा परिषद एक प्रस्ताव पारित कर सकती है लेकिन इस प्रस्ताव में ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने की बात नहीं होगी क्योंकि चीन और रूस इसके ख़िलाफ़ हैं. इस माहौल के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि आईएईए के ज़रिए ये विवाद बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “ इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में बहस हो रही है और हम अन्य देशों के साथ इस मामले पर सहयोग कर रहे हैं. लेकिन हमें लगता है कि शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए ईरान को परमाणु तकनीक विकसित करने देने में कुछ ग़लत नहीं है.” उधर ब्रिटेन ने ईरान पर और दबाव बनाने की बात कही है तो जर्मनी ने कहा है कि इस मामले को कूटनीति से सुलझाया जाना चाहिए. फ़्रांस ने कहा है कि इस मामले में अभी भी बातचीत के दरवाज़े अभी भी खुले हुए हैं. ईरान को सुरक्षा परिषद ने अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने और आईएईए के साथ सहयोग करने के लिए 28 अप्रैल तक की समय सीमा तय की गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अन्य देशों को भी परमाणु तकनीक देंगे'25 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना परमाणु कार्यक्रम पर पीछे नहीं हटेंगे: ईरान 13 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान पर प्रतिबंध का विचार उचित नहीं'31 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान गंभीर चिंता है:बुश11 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान विवाद अब सुरक्षा परिषद में 08 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने कहा, दबाव में नहीं आएंगे05 मार्च, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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