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ईरान गंभीर चिंता है:बुश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु कार्यक्रम मुद्दे ईरान पर दबाव बढ़ाने के अमरीकी प्रयासों की अगली कड़ी के रूप में अब राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि यह कार्यक्रम अमरीका की एक राष्ट्रीय सुरक्षा की गंभीर चिंता है. बुश ने ईरान को एक गंभीर ख़तरा बताते हुए कहा है कि इस देश की मंशा के बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता. बुश ने कहा है कि ईरान में ऐसे शासक हैं जिनकी कोई जवाबदेही नहीं है. जॉर्ज बुश ने कहा कि अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ईरान के परमामु कार्यक्रम मुद्दे से सख़्ती से निपटे. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस भी इस मसले पर पहले इसी तरह का सख़्त बयान दे चुकी हैं. संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षा परिषद के लिए एक चुनौती बताया था. सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई देश अब इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम मसले से कैसे निपटा जाए. ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस मसले पर कार्रवाई के लिए एक रिपोर्ट हाल ही में सुरक्षा परिषद को भेजी है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति मामलों के प्रमुख ज़ेवियर सोलाना ने कहा है कि वह सुरक्षा परिषद में ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने को मंज़ूरी मिलने की संभावना से इनकार नहीं करते हैं. लेकिन उन्होंने कहा है कि अब भी कूटनीतिक प्रयासों के लिए गुंजाइश बची हुई है. अमरीका कहता है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम के ज़रिए हथियार बनाना चाहता है जबकि ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान पर बैठक बिना नतीजे के ख़त्म03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान-रूस की बैठक आशा के साथ समाप्त21 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना परमाणु शोध कार्यक्रम जारी रहेगा: ईरान20 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना फ़्रांस ने ईरान पर निशाना साधा16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने संवर्धन का काम 'फिर' शुरू किया14 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना परमाणु अप्रसार संधि छोड़ने की धमकी11 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान मामले में आगे क्या होगा?05 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान परमाणु केंद्रों की निगरानी रोकेगा04 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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