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शनिवार, 04 फ़रवरी, 2006 को 17:20 GMT तक के समाचार
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ईरान परमाणु केंद्रों की निगरानी रोकेगा
महमूद अहमदीनेजाद
ईरान ने प्रस्ताव को राजनीतिक हथकंडा बताते हुए कहा है कि वह यूरेनियम संवर्द्धन शुरू करेगा
ईरान ने अपने परमाणु मामले की शिकायत सुरक्षा परिषद में किए जाने के फ़ैसले के बाद अपने परमाणु केंद्रों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी को तत्काल रोकने की घोषणा की है.

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने देश की परमाणु संस्था को आदेश दिया है कि वह तत्काल प्रभाव से इस निगरानी में सहयोग देना बंद कर दे.

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षक ईरान के परमाणु केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते थे.

लेकिन ईरानी राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान अब केवल परमाणु अप्रसार संधि के दायरे के भीतर रहकर ही आईएईए के साथ सहयोग करेगा.

इससे पहले शनिवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शिकायत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से करने का फ़ैसला किया.

ईरान ने इस प्रस्ताव को एक राजनीतिक हथकंडे का नाम देते हुए कहा है कि उनका देश तत्काल यूरेनियम संवर्द्धन शुरू करने जा रहा है.

प्रस्ताव

आईएईए के निदेशक मंडल के 35 सदस्य देशों में से 27 ने इस के समर्थन में वोट दिया जबकि तीन देशों ने इसके विरोध में.

इस प्रस्ताव के मसौदे को अब आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गर्वनर्स के पास भेजा जा रहा है, जो इस पर अंतिम निर्णय लेंगे, उन्हें अपना निर्णय छह सप्ताह के भीतर लेना है.

आईएईए में भारत के विशेष दूत शीलकांत शर्मा ने बीबीसी को बताया कि इसका यह मतलब नहीं लगाना चाहिए कि मामला सुरक्षा परिषद में चला गया है, "अभी छह सप्ताह का समय बाक़ी है, उस समय तक यह मसला आईएईए के भीतर ही है और कूटनीति प्रयास जारी रहेंगे."

35 में से 27 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया

पाँच देशों ने इस मामले पर मतदान में भाग नहीं लेने का फ़ैसला किया है.

भारत ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है.

यह फ़ैसला कई दिनों की कूटनीतिक रस्साकशी के बाद सामने आया है, वियना में आईएईए की बैठक पिछले तीन दिनों से जारी थी.

इस मामले पर मतदान शुक्रवार को ही होना था लेकिन कूटनीति बहस की वजह से इसे शनिवार तक टालना पड़ा.

 यह बहुपक्षीय मामला है ईरान से अच्छे रिश्ते हमेशा की तरह बने रहेंगे
शीलकांत शर्मा, आईएईए में भारतीय दूत

आईएईए के इस निर्णय के बाद माना जा रहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का रास्ता खुल सकता है.

आईएईए में ईरान के प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब उनका देश यूरेनियम संवर्धन के काम में पूरी तरह से जुट जाएगा.

अमरीका, ब्रिटेन जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के उद्देश्य से यूरेनियम संवर्धन कर रहा है लेकिन ईरान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है.

रूस, चीन और भारत जैसे देशों का कहना रहा है कि ईरान के मामले को आपसी बातचीत के ज़रिए आईएईए में ही सुलझाना चाहिए और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं ले जाना चाहिए.

भारत का रूख़

भारत ने आईएईए में लाए गए एक प्रस्ताव पर पिछले वर्ष भी ईरान के ख़िलाफ़ वोट दिया था.

अब तक भारत ज़ोर देता रहा है कि ईरान के मामले को सुरक्षा परिषद भेजने की जगह उसे आईएईए में ही सुलझा लेना चाहिए.

ईरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजने के भारत के फ़ैसले के बारे में आईएईए में भारत के विशेष दूत शीलकांत शर्मा ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा है कि "यह बहुपक्षीय मामला है ईरान से अच्छे रिश्ते हमेशा की तरह बने रहेंगे."

भारत में सत्ताधारी यूपीए गठबंधन को समर्थन देने वाले वामपंथी मोर्चे का दबाव रहा है कि भारत अमरीका और यूरोपीय देशों के प्रस्ताव के पक्ष में वोट न दे.

प्रस्तावः एक नज़र
आईएईए के ईरान के परमाणु कार्यक्रम संबंधी प्रस्ताव की मुख्य बातें.
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