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अमरीका ने ईरान पर दबाव बढ़ाया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि उनका देश ईरानी परमाणु मामले को सुरक्षा परिषद को सौंपने पर ज़ोर देता रहेगा. उन्होंने कहा, "इस विषय पर सुरक्षा परिषद के बाहर विचार करने का मौक़ा बीत चुका है." राइस ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि रूसी समझौता योजना दरअसल मुद्दे को लटकाए रखने की ईरान की नीति का हिस्सा है. रूस ने ईरान से पेशकश की है कि वह अपने उपयोग के लिए परमाणु संवर्द्धन का काम स्वयं नहीं करे, बल्कि रूस में कराए. एजेंसी की महत्वपूर्ण बैठक दो फ़रवरी को वियना में हो रही है जिसमें इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा. रूस ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ईरान मामले को अंतिम रूप से सुरक्षा परिषद में नहीं भेज कर मात्र चर्चा के लिए भेजे. चीन ने रूसी प्रस्ताव का स्वागत किया है. चीन भी ईरान पर इस समय प्रतिबंध लगाने की योजना का विरोधी है. अमरीका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान ने हमेशा इस आरोप का खंडन किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरानी वार्ताकार का चीन दौरा26 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान समझौते के लिए तैयार: लारीजानी18 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना रूस और चीन ने कहा धैर्य ज़रूरी17 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान के बारे में बारादेई का शक16 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना तेल का दाम बढ़ने की ईरान की चेतावनी15 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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