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गुरुवार, 30 मार्च, 2006 को 07:23 GMT तक के समाचार
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बैठक
एक ईरानी परमाणु केंद्र
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है जिसपर अमरीका को संदेह है
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आज दुनिया के छह शक्तिशाली देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अगला क़दम उठाने के लिए चर्चा रहे हैं.

इस बैठक में अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के विदेश मंत्री हिस्सा ले रहे हैं.

इससे पहले बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान से यूरेनियम संवर्द्धन का काम रोकने की माँग करनेवाले एक बयान को मंज़ूरी दे दी जिसमें ईरान को माँग पूरी करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है.

बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि बर्लिन बैठक का मुख्य उद्देश्य ये तय करना है कि अगर ईरान सुरक्षा परिषद की माँग को नहीं स्वीकार करता है तो इसके बाद क्या क़दम उठाया जाना चाहिए.

अमरीका और कुछ अन्य देशों को संदेह है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु हथियारों का विकास कर रहा है लेकिन ईरान लगातार ये कह रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

बयान

 इस बयान से ईरान को ये स्पष्ट संदेश जाता है कि वह जो कर रहा है उस तथ्य को स्वीकार नहीं करने के लिए जो कर रहा है वह अपर्याप्त है
जॉन बोल्टन, संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को एकमत से ईरान से यूरेनियम संवर्द्धन का काम रोकने के लिए आग्रह करनेवाला बयान स्वीकार कर लिया.

हालाँकि ये बयान अबाध्यकारी है यानी ईरान के लिए ये आवश्यक नहीं है कि वह इस बयान को स्वीकार ही करे.

इस बयान पर कई सप्ताह तक चर्चा हुई जिसके बाद बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों ने मतदान कर इसे स्वीकार कर लिया.

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा,"इस बयान से ईरान को ये स्पष्ट संदेश जाता है कि वह जो कर रहा है उस तथ्य को स्वीकार नहीं करने के लिए जो कर रहा है वह अपर्याप्त है".

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत जवद ज़ारिफ़ का कहना थी,"ईरान के साथ धमकीबाज़ी नहीं चलती, ईरान को इस तरह के दबाव डालने की नीतियों से एलर्जी है".

माँग और बदलाव

 ईरान के साथ धमकीबाज़ी नहीं चलती, ईरान को इस तरह के दबाव डालने की नीतियों से एलर्जी है
जवद ज़ारिफ़, संयुक्त राष्ट्र में ईरानी दूत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जो बयान स्वीकार किया है वह उस बयान का तीसरा मसौदा है जिसे फ्रांस और ब्रिटेन ने तैयार किया था और जिसमें रूस और चीन के मतों के अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं.

ईरान के सहयोगी रूस और चीन की चिंता ये है कि ईरान के मुद्दे को सुरक्षा परिषद तक ले जाने से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लग सकता है. उनकी राय है कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग पर छोड़ देना चाहिए.

बयान में ये कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के महानिदेशक को ईरान के बारे में ये रिपोर्ट देनी होगी कि उसने यूरेनियम संवर्द्धन रोकने की माँग को माना या नहीं.

लेकिन इस बार इसके लिए ईरान को 14 दिन के स्थान पर 30 दिन का समय दिया गया है.

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