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गुरुवार, 02 मार्च, 2006 को 23:28 GMT तक के समाचार
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आईएईए ने समझौते का स्वागत किया
बुश-मनमोहन
भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौता हुआ है
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अध्यक्ष ने भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते का स्वागत किया है.

जबकि अमरीकी कांग्रेस में राष्ट्रपति बुश के विरोधियों ने समझौते की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे परमाणु हथियारों का प्रसार बढ़ेगा.

आईएईए के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई ने कहा कि इस समझौते से परमाणु अप्रसार की कोशिशों को बढ़ावा मिलेगा.

अंतराराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ब्रिटेन और फ़्रांस ने भी इस समझौते का स्वागत किया है जबकि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने कहा है कि वो भी अमरीका के साथ ऐसा ही सहयोग चाहता है.

 परमाणु अप्रसार की कोशिशों को बढ़ावा देने और परमाणु सुरक्षा बढ़ाने में ये समझौता मील का पत्थर साबित होगा
मोहम्मद अल बारादेई

आईएईए के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई ने कहा है कि परमाणु गतिविधियों को लेकर भारत अब तक अलग थलग था पर इस समझौते के बाद ये बदल जाएगा.

मोहम्मद अल बारादेई का कहना था, "परमाणु अप्रसार की कोशिशों को बढ़ावा देने और परमाणु सुरक्षा बढ़ाने में ये समझौता मील का पत्थर साबित होगा."

आईएईए अध्यक्ष ने ये भी कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में भी ये समझौता अहम रहेगा.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम क़दम है.

वहीं फ़्रांस के राष्ट्रपति ने कहा है कि इस समझौते से जलवायु परिवर्तन और परमाणु अप्रसार के प्रयासों को बल मिलेगा.फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने भी पिछले महीने अपनी भारत यात्रा के दौरान भारत के साथ ऐसा ही समझौता किया था.

चीन-पाकिस्तान का रुख़

उधर चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये समझौता अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि के प्रावधानों के दायरे में होना चाहिए.

 पाकिस्तान के साथ ऐसे समझौते का ये समय नहीं है, सब जानते हैं कि परमाणु प्रसार को लेकर पाकिस्तान के बारे में चिंताएँ हैं
कॉडोलीज़ा राइस

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने बीबीसी से कहा कि भारत का अमरीका से जो समझौता हुआ है, पाकिस्तान का भी ऐसा ही दावा बनता है.

लेकिन अमरीका की विदेश मंत्री कॉंडोलीज़ा राइस ने एक भारतीय टेलीवीज़न चैनल से बातचीत में कहा, "पाकिस्तान के साथ ऐसे समझौते का ये समय नहीं है, सब जानते हैं कि परमाणु प्रसार को लेकर पाकिस्तान के बारे में चिंताएँ हैं."

उनका इशारा शायद पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर खान की ओर था जिन्होंने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु जानकारी देने की बात स्वीकार की है.

अमरीकी कांग्रेस

अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य एड मार्की ने समझौते को एक बड़ी ग़लती बताया है.

उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के मसले पर पाकिस्तान, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों पर दबाव डालने की कोशिशों पर इस समझौते से असर पड़ेगा.

गुरुवार को भारत और अमरीका के बीच हुए समझौते के तहत अमरीका भारत को परमाणु तकनीक मुहैया करवाएगा और भारत अपने असैनिक रियेक्टरों को आईएईए के निरीक्षण में रखेगा.

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