|
'इराक़ के कारण हमलों का ख़तरा बढ़ा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के बारे में कराए गए बीबीसी के एक सर्वेक्षण में अधिकांश लोगों ने माना है कि इराक़ युद्ध के कारण दुनिया भर में आतंकवादी हमलों का ख़तरा बढ़ा है. ये सर्वेक्षण 35 देशों में कराया गया और उनमें से 33 देशों में अधिकतर लोगों ने ख़तरा बढ़ने की बात मानी. लगभग 60 प्रतिशत लोगों ने माना कि आतंकवादी हमलों का ख़तरा बढ़ा है जबकि केवल 12 प्रतिशत लोगों ने माना कि ख़तरा कम हुआ है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के इस सर्वेक्षण में लगभग 42 हज़ार लोगों से सवाल पूछे गए. सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबस्कैन ने किया. 21 देशों में लोगों ने माना कि वर्ष 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाए जाने को एक ग़लती माना जबकि 11 देशों के लोगों ने इसे सही फ़ैसला बताया. तीन देशों में लोगों के मत विभाजित रहे. ग्लोबस्कैन के अध्यक्ष डाउ मिलर कहते हैं,"ये अब आधिकारिक है..दुनिया भर के लोगों का कहना है कि पश्चिमी देशों ने इराक़ पर हमला कर एक बुनियादी ग़लती की है". इराक़ से वापसी सर्वेक्षण में अधिकतर लोगों ने कहा कि अमरीकी की अगुआई वाले सैनिकों को अगले कुछ महीनों में इराक़ से निकल जाना चाहिए. 20 देशों में लोगों ने सैनिकों के लौटने की बात का पूरा समर्थन किया. नौ देशों में लोगों का कहना था कि सैनिकों को रहना चाहिए जबकि छह देशों में इस बात पर मतभेद थे. लेकिन अधिकतर लोगों ने ये भी कहा कि अगर इराक़ सरकार चाहती हो तो वहाँ विदेशी सैनिक रह सकते हैं. अर्जेंटीना में 80 प्रतिशत, मिस्र में 76 प्रतिशत, चीन में 67 प्रतिशत और ब्राज़ील में 67 प्रतिशत लोग सैनिकों की वापसी के पक्ष में थे. अमरीका में 58 प्रतिशत, अफ़ग़ानिस्तान में 58 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया में 57 प्रतिशत और ब्रिटेन में 56 प्रतिशत लोग चाहते थे कि सैनिकों को इराक़ में रहना चाहिए. इराक़ में मत-विभाजन सर्वेक्षण में पाया गया कि ख़ुद इराक़ी लोगों में अमरीकी सैनिकों के इराक़ में रहने के बारे में अलग-अलग राय है. 49 प्रतिशत इराक़ी मानते हैं कि उनको चले जाना चाहिए जबकि 49 प्रतिशत का मानना है कि उनको रहना चाहिए. वहीं 53 प्रतिशत इराक़ी मानते हैं कि अगर सरकार चाहती हो तो अमरीकी सैनिकों को वहाँ रहना चाहिए. मगर सद्दाम हुसैन के हटने को इराक़ी बहुमत सही मानता है. 74 प्रतिशत इराक़ी मानते हैं कि सद्दाम हुसैन का जाना एक अच्छी घटना थी. | इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम ने भूख हड़ताल समाप्त की27 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में हथियारों पर नियंत्रण27 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में हिंसा जारी, 30 और मरे26 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना शिया-सुन्नियों का एकता का आह्वान25 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में शिया-सुन्नी हिंसा भड़की23 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना बसरा में 11 सुन्नी क़ैदियों की हत्या23 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इराक़ को अमरीका की दो टूक चेतावनी21 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना स्ट्रॉ का राष्ट्रीय सरकार बनाने का आह्वान21 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||