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गुरुवार, 23 फ़रवरी, 2006 को 17:59 GMT तक के समाचार
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इराक़ में शिया-सुन्नी हिंसा भड़की
प्रदर्शनकारी
अल अस्करी मज़ार पर हुए हमले के बाद कई सुन्नी मस्जिदों में तोड़ फ़ोड़ हुई है
इराक़ के समारा इलाक़े में अली अल हादी और अल अस्करी के मज़ार परिसर को बुधवार को विस्फोट में हुए नुक़सान के बाद शिया और सुन्नी समुदायों के बीच हिंसा की ख़बरें हैं और राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने स्थिति पर विचार के लिए आपात बैठक की.

राजधानी बग़दाद में पुलिस ने कहा कि उन्हें शिया और सुन्नी समुदायों के बीच भड़की हिंसा के बाद रात में 100 लोगों के शव मिले हैं जिन पर गोलियों के निशान हैं.

राष्ट्रपति तालाबानी ने शिया और सुन्नी समुदायों के बीच तनाव दूर करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों की आपात बैठक की.

बैठक के बाद तालाबानी ने सभी पक्षों पर होने वाले हमलों की निंदा की और चेतावनी दी कि अगर देश में गृहयुद्ध शुरू होता है तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा.

लेकिन सुन्नियों के एक प्रमुख दल इराक़ी एकोर्डेंस फ्रंट ने आपात बैठक का बहिष्कार किया और घोषणा की कि वह सरकार चलाने वाले गठबंधन से अपना हाथ खींच रहा है.

फ्रंट ने कहा है कि ऐसा सुन्नियों की 160 मस्जिदों पर हुए हमले के विरोध में किया जा रहा है.

इस फ्रंट ने आरोप लगाया है कि कुछ शिया धार्मिक अधिकारियों ने प्रदर्शनों को उकसाया है.

बग़दाद में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और सेना और पुलिसकर्मियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई हैं.

हिंसा

अल अस्करी मस्जिद में हुए बम हमले के बाद इराक़ में कई जगह हिंसक घटनाएँ हुई हैं. कई सुन्नी मस्जिदों पर हमले किए गए हैं.

अल अस्करी मज़ार पर हुए हमले में मज़ार को बहुत नुकसान पहुँचा है

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक दुबई स्थित अल अरबिया टेलीवीज़न चैनल के लिए काम करने वाले तीन इराक़ी पत्रकारों के शव भी समारा शहर के पास मिले हैं.

पुलिस ने कहा है कि ये तीन पत्रकार बुधवार को समारा शहर में अल अस्करी मज़ार पर हुए हमले की रिपोर्टिंग के लिए गए थे और वहीं उनका अपहरण किया गया और फिर उन्हें मार दिया गया.

इराक़ी नेता लोगों को गृह युद्ध के ख़तरे से आगाह कर रहे हैं.

हिंसा

पुलिस के मुताबिक गुरुवार को बक़ूबा शहर में कुछ लोगों ने सुन्नियों की एक मस्जिद पर हमला किया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो घायल हो गए.

 आप अचानक सब कुछ शांत हो जाने की उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि कुछ लोगों की प्रतिक्रिया आप नियंत्रित नहीं कर सकते
अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी के प्रवक्ता

दक्षिणी इराक़ी शहर बसरा में भी कुछ बंदूकधारियों ने एक जेल से 12 क़ैदियों को निकाला और फिर इनमें से 11 लोगों को मार डाला.

इससे पहले शिया मौलवी मुक़तदा अल सद्र के समर्थकों और सुन्नी लोगों के बीच भी झड़पे हुईं थी.

'गृह युद्ध'

इराक़ के राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने का आह्ववान किया है. लेकिन इराक़ में शियाओं के शीर्ष आध्यात्मिक नेता अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी के प्रवक्ता ने कहा है कि लोगों के गुस्से को काबू में रख पाना मुश्किल होगा.

आयतुल्ला अली अल-सिस्तानी के प्रवक्ता ने लंदन में बीबीसी से कहा, "आप अचानक सब कुछ शांत हो जाने की उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि कुछ लोगों की प्रतिक्रिया आप नियंत्रित नहीं कर सकते."

इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालबानी ने देश को गृहयुद्ध से बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों से मिलकर काम करने की अपील की है.

राष्ट्रपति तालबानी ने आरोप लगाया कि हथियारबंद लोगों के एक गिरोह ने इराक़ में सरकार के गठन को रोकने के उद्देश्य से मज़ार पर हमला किया.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक मज़ार पर हुए हमले से इराक़ में गृह युद्ध शुरू होने का ख़तरा बढ़ सकता है क्योंकि इस हमले को एक समुदाय विशेष की पहचान पर हमले के रूप में देखा जा रहा है.

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