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हमास से वास्ता नहीः इसराइल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल के कार्यकारी प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्त ने कहा है कि वो तब तक हमास से कोई संपर्क नहीं रखेंगे जब तक हमास आतंक को नहीं त्यागता और ये नहीं मानता कि इसराइल को अपना अस्तित्व बचाने का अधिकार है. फ़लस्तीनी चुनावों में हमास को मिली ज़बरदस्त सफलता के बाद आज इसराइली मंत्रिमंडल की बैठक में ओलमर्त ने एक बार फिर से कड़े रुख़ का इज़हार किया. हमास को चरमपंथी इस्लामी संगठन माना जाता है जिसने कई बार कहा है कि इसराइल का विघटन उसका ध्येय है. कार्यकारी प्रधानमंत्री ओलमर्त ने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को बताया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं से अपने इस संकल्प के बारे में बात कर ली है और वे सभी सहमत हैं. इसराइली सरकार का कहना है कि हमास के बारे में उसका रवैया यूरोपीय संघ और अमरीका जैसा ही है. पश्चिमी नज़रिया यूरोपीय संघ और अमरीका ने हमास को आतंकवादी संगठन क़रार दिया है. इसराइल में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं और ऐसी स्थिति में अब इस बात की संभावना कम ही है कि इसराइली सरकार हमास के प्रति अपने रुख़ में नर्मी लाएगी. येरुशलम से बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि इस तनाव के बावजूद इसराइल फ़लस्तीनी प्रशासन को बिखरने नहीं देना चाहता. उनके मुताबिक़ ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है. अगर आर्थिक मदद बंद कर दी जाए और कर से होने वाली आय को रोक दिया जाए तो फ़लस्तीनी प्रसाशन असफल हो जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें फ़तह समर्थकों का दूसरे दिन भी प्रदर्शन28 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना हमास ने हिंसा त्यागने की माँग ठुकराई28 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना फ़लस्तीनी चुनाव पर संशय की स्थिति02 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना फ़लस्तीनी चुनाव में हमास की बड़ी जीत26 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना सरकार गठन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होगी27 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना जीत के बाद हमास का रुख़ बदलेगा?27 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना फ़तह का प्रदर्शन, हमास को निमंत्रण27 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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