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यहूदी जनसंहार पर ईरानी सम्मेलन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने कहा है कि दूसरे विश्व युद्ध के समय जर्मनी में यहूदियों के कथित जनसंहार के आकार और परिणामों का अंदाज़ा लेने के लिए एक सम्मेलन किया जाएगा. ग़ौरतलब है कि ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद पहले ही उस जनसंहार को एक मिथक बता चुके हैं. ईरान सरकार के एक प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि सम्मेलन में यहूदी जनसंहार के "वैज्ञानिक सबूतों" की जाँच-पड़ताल की जाएगी. ग़ौरतलब है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी शासन के हाथों लगभग साठ लाख यहूदियों का जनसंहार हुआ था. राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने वर्ष 2005 में यह बयान भी दिया था कि इसराइल को "दुनिया के नक्शे से मिटा देना चाहिए" या फिर उसे यूरोप या अमरीका में स्थानांतरित कर देना चाहिए. उनके इस बयान की तीखी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया हुई थी. उनके इस बयान का मुस्लिम प्रेस के कुछ हिस्सों में स्वागत किया गया लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निंदा हुई थी. 'अजब दुनिया' ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामिद रज़ा आसफ़ी ने कहा कि इस मुद्दे पर बहस की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए, "यह अजब दुनिया है. यहाँ हर मुद्दे पर बहस संभव है, सिवाय यहूदी जनसंहार के." उन्होंने कहा, "विदेश मंत्रालय एक सेमिनार करेगा जिसमें यहूदी जनसंहार के वैज्ञानिक पहलू पर बहस होगी और उसके नतीजों की समीक्षा भी." हालाँकि प्रवक्ता ने यह जानकारी नहीं दी कि यह सेमिनार कब और कहाँ होगा और इसमें कौन-कौन भाग लेंगे. बढ़ता तनाव इसराइल के बारे में ईरानी राष्ट्रपति के यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है.
अमरीका और यूरोप इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जाए. ईरान का कहना है कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ ऊर्जा ज़रूरतों के लिए चलाना चाहता है लेकिन पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान का लक्ष्य परमाणु हथियार हासिल करना है. ईरान ने पश्चिमी देशों को आगाह करते हुए कहा है कि अगर उन्होंने यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की क़ीमतें बढ़ सकती हैं. ईरान दुनिया में चौथे नंबर का सबसे ज़्यादा तेल निर्यातक देश है. बीबीसी संवाददाता जोनाथन चार्ल्स का कहना है कि अन्य शब्दों में इसे इस तरह कहा जा सकता है कि "हम पर चोट मत करो, वरना हम तुम पर चोट करेंगे." इस बीच तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक में ईरान के प्रतिनिधि ने रविवार को तेल उत्पादन कम करने का आहवान किया जिससे क़ीमतों पर कुछ और दबाव बनाया जा सके. | इससे जुड़ी ख़बरें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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