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शांति आयोग के गठन पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नया शांति आयोग बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है. शांति आयोग का मकसद होगा कि उन देशों में हिंसा का दौर फिर से न फैलने पाए जहाँ संघर्ष के बाद स्थिति सामान्य हो रही है. नया आयोग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सलाह देगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इस आयोग का गठन संयुक्त राष्ट्र को नया रूप देने की कोशिशों का हिस्सा है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा के कई कूटनीतिज्ञों का मानना है कि अब सुरक्षा परिषद का अधिकार क्षेत्र बहुत बढ़ जाएगा. इस साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र का विशेष सम्मेलन हुआ था. इसी सम्मेलन में इस आयोग के गठन समेत कई मुद्दों पर सहमति हुई थी. सितंबर में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में अमरीकी राजदूत जॉन बॉल्टन के सुझाये गए प्रस्तावों को लेकर संयुक्त राष्ट्र, विकासशील देश और अमरीका के बीच कई असहमतियां पैदा हो गईं थी. इसेक बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने ज़्यादातर विवादास्पद मुद्दों को मसौदे से बाहर कर दिया था. निशस्त्रीकरण के मसले को लेकर ख़ासतौर पर काफ़ी विवाद था. संयुक्त राष्ट्र में सुधारों को लेकर जो आरंभिक मसौदा तैयार हुआ था उसमें निशस्त्रीकरण की बात भी शामिल थी. लेकिन जिस मसौदे पर आख़िर में सहमति बनी थी उसमें निशस्त्रीकरण का मुद्दा शामिल नहीं किया गया था. महासचिव कोफ़ी अन्नान ने मसौदे में इस मुद्दे को दरकिनार किए जाने पर अफ़सोस जताया था. | इससे जुड़ी ख़बरें संयुक्त राष्ट्र सुधारः क्या हुआ, क्या नहीं14 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना सुधारों पर मतभेद बरक़रारः अन्नान14 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र में सुधार के मसौदे पर सहमति13 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना 'जाँच रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र पर उठे सवाल'07 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना सुरक्षा परिषद का विस्तार अनिवार्य: नटवर20 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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