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सुधारों पर मतभेद बरक़रारः अन्नान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेदों के कारण लगता नहीं कि संगठन में बुनियादी सुधारों को संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में स्वीकृति मिल सकेगी. न्यूयॉर्क में तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में कोफ़ी अन्नान ने दुनिया भर से आए 170 से अधिक नेताओं से कहा कि बाधाओं के बावजूद सुधार की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए. सत्र के पहले दिन अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह बदलते समय के साथ उभरी चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्था में सार्थक सुधारों के लिए प्रयास करे. संयुक्त राष्ट्र महासभा का इस बार का वार्षिक सम्मेलन विशेष है क्योंकि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस सम्मेलन को बृहस्पतिवार 15 सितंबर को संबोधित करेंगे. अन्नान का आग्रह संयुक्त राष्ट्र के 60 साल पूरे होने पर वहां जुटे 150 से भी ज़्यादा राष्ट्राध्यक्षों और राजदूतों को बुश से पहले महासचिव कोफ़ी अन्नान ने संबोधित किया. अन्नान ने कहा कि सदस्य देशों के बीच उभरे मतभेदों के कारण जिस तरह के सुधारों पर समझौते की उम्मीद थी वो नहीं वो पाए. उन्होंने कहा समस्या चाहे भूख़ और ग़रीबी की हो या लोगों की ज़िंदगियाँ बचाने की सबको मिलकर काम करना होगा. उनका कहना था,"आज की चुनौतियाँ ऐसी हैं जिनके सामने हम या तो साथ उठेंगे या साथ गिरेंगे". अन्नान के भाषण में काफ़ी हद तक सुधारों के मसौदे पर जो असहमतियां उभरी हैं उनकी ओर इशारा था. आतंकवाद
अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में दुनिया के देशों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट होने की सलाह देते हुए कहा है कि आतंकवाद सीमाएँ नहीं देखता. बुश का ये बयान संयुक्त राष्ट्र में सुधारों पर बड़ी मुश्किल से बनी सहमति के बाद आया है. इन प्रस्तावित सुधारों के मसौदे में आतंकवाद की भर्त्सना की बात तो है लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस शब्द की एक परिभाषा पर सहमत नहीं हो सका. और बुश ने उस ओर इशारा करते हुए कहा, "कोई भी कारण आतंकवाद को जायज़ नहीं ठहरा सकता". बुश ने दुनिया में मुक्त व्यापार की राह में जो बाधाएँ हैं उन्हें भी हटाने की बात करते हुए कहा केवल सहायता और राहत से ग़रीबी नहीं मिटाई जा सकती. उनका कहना था," मुक्त व्यापार से न केवल लाखों लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला जा सकता है बल्कि ये आतंकवाद के लिए भी करारा झटका हो सकता है". |
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