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गुरुवार, 01 दिसंबर, 2005 को 02:34 GMT तक के समाचार
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संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी राहत अपील
भूकंप पीड़ित
पाकिस्तान में आए भूकंप के बाद राहत कार्यों के बारे में पुनर्विचार की आवश्यकता हुई
संयुक्त राष्ट्र ने अब तक की सबसे बड़ी सहायता राशि की अपील जारी की है.

संस्था को 26 देशों में युद्ध, अकाल और प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों के लिए 4.7 अरब डॉलर की राशि की आवश्यकता है.

संयुक्त राष्ट्र में राहत कार्यों के शीर्ष अधिकारी यान एगेलैंड ने कहा है कि ये राशि पूरी दुनिया में दो दिन के सैनिक ख़्रर्च के बराबर है.

उन्होंने कहा,"अगर हमें अमीर लोगों से उनकी दो कप कॉफ़ी की कीमत के बराबर भी राशि मिल गई तो हम निराशाजनक स्थिति में रहनेवाले तीन करोड़ लोगों की ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे".

 ये बिल्कुल अक्षम्य है कि संसाधन होते हुए भी हम दुःख को दूर करने के लिए कुछ नहीं कर रहे
कोफ़ी अन्नान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ये राशि दे सकता है लेकिन उसे अब इसके लिए इच्छाशक्ति दिखानी होगी.

वर्ष 2006 के लिए मानवीय अपील जारी करते हुए कोफ़ी अन्नान ने कहा,"ये बिल्कुल अक्षम्य है कि संसाधन होते हुए भी हम दुःख को दूर करने के लिए कुछ नहीं कर रहे".

संयुक्त राष्ट्र ने जिन कार्यों के लिए राहत अपील जारी की है उनमें कश्मीर क्षेत्र में आए भूकंप और पिछले वर्ष के अंत में सूनामी से प्रभावित लोगों की सहायता भी शामिल है.

देश

 अगर हमें अमीर लोगों से उनकी दो कप कॉफ़ी की कीमत के बराबर भी राशि मिल गई तो हम निराशाजनक स्थिति में रहनेवाले तीन करोड़ लोगों की ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे
यान एगेलैंड

संयुक्त राष्ट्र जिन 26 देशों में राहत कार्य करना चाहता है उनमें कई देश अफ़्रीका के हैं.

संस्था विशेष रूप से सूडान के लिए डेढ़ अरब डॉलर चाहती है जिसे पश्चिम के हिंसा प्रभावित दारफ़ुर क्षेत्र और दक्षिण के शांत हो चुके इलाक़ों में राहत के लिए बाँटा जाएगा.

इसके साथ ही आइवरी कोस्ट और लाइबेरिया समेत पश्चिम अफ़्रीका के भी देशों में राहत कार्यों के लिए अपील की गई है.

इनके अतिरिक्त रूस में चेचन्या क्षेत्र और फ़लस्तीनी क्षेत्रों तथा गुआटेमाला के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी सहायता माँगी गई है.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी यान एगेलैंड का कहना है कि काम काफ़ी जटिल है और इसके लिए और अधिक मदद की ज़रूरत है.

एगेलैंड ने कहा कि ये राशि इस दुनिया में सैनिक ज़रूरतों के लिए होनेवाले दो दिन के ख़र्च के बराबर है.

बीबीसी की संयुक्त राष्ट्र संवाददाता सुज़ाना प्राइस का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र हर साल जितनी राशि माँगता है, औसतन उसका तीन चौथाई से भी कम हिस्सा उसे मिल पाता है.

संवाददाता के अनुसार और कई देश बिल्कुल अंतिम समय में रकम देते हैं जिससे मुश्किल बढ़ जाती है.

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