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भारत समेत पड़ोसी देश सचेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने पूर्वी राज्यो में बर्ड फ़्लू के मामलों की जाँच के लिए जाँच दल भेजने का फ़ैसला लिया है. सरकार ने बॉंबे नेचुरल हिस्टरी सोसाइटी से कहा है कि जब इस इलाक़े में प्रवासी पक्षी आएँ तो उनके ख़ून के नमूने लिए जाएँ. उड़ीसा में वन्यजीव सोसाइटी के सचिव बिसवजीत मोहंती ने बताया कि केंद्र सरकार ने उड़ीसा सरकार को तीन महीने पहले बर्ड फ़्लू के खतरे के बारे में लिखा था लेकिन इससे निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए. हालांकि उड़ीसा राज्य में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि राज्य को केंद्र सरकार से कोई आदेश नहीं मिला है. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक पीके सेनापति का कहना है कि राज्य सरकार को केंद्र सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं मिले. बर्ड फ़्लू के ख़तरे के प्रति सचेत न रहने के लिए वन्यजीव कर्मियों ने राज्य सरकार की आलोचना की है. पड़ोसी देश उधर भारत के पड़ोसी राज्य नेपाल में अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने यूरोप से पोल्ट्री उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी है. अधिकारियों का कहना है कि ऐसा नेपाल में बर्ड फ़्लू को फैलने से रोकने के लिए किया गया है. वहीं बांग्लादेश में वन अधिकारियों से कहा गया है कि प्रवासी पक्षियों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रखी जाए. बांग्लादेश के मछली और पशुपालन मंत्री ने बताया कि ये एहतियाती कदम है और बांग्लादेश बर्ड फ़्लू से मुक्त है. वेतनाम में भी बर्ड फ़्लू से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. अधिकारियों ने कहा है कि बर्ड फ़्लू के मरीज़ों का मुफ़्त इलाज किया जाएगा. वेतनाम में बर्ड फ़्लू के चलते सबसे ज़्यादा मनुष्यों की जान गई है. चीन में भी इस हफ़्ते पक्षियों में एच5एन1 वायरस पाए जाने की पुष्टि हुई है. |
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