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राइस ने ईरान पर ब्रिटेन से समर्थन मांगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ ईरान और इराक़ के मामले पर चर्चा की है. अमरीका ईरान के मुद्दे पर ब्रिटेन के समर्थन चाहता है. बातचीत के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेताओं ने ईरान मामले पर अपनी चिंता से एक-दूसरे को अवगत कराया. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहिए. दोनों नेताओं के बीच इराक़ मामले पर भी बात हुई. प्रवक्ता ने बताया कि इराक़ में नए संविधान पर हुए जनमतसंग्रह में लोगों की बड़ी संख्या में हिस्सेदारी से दोनों नेता उत्साहित हैं. दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई कि दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव से इराक़ में राजनीतिक प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी. अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ईरान के मुद्दे पर यूरोपीय देशों का समर्थन हासिल करने के लिए दौरे पर आई थीं. विदेश मंत्री राइस ने ब्रिटेन के उन आरोपों का समर्थन किया कि दक्षिणी इराक़ में ब्रितानी सैनिकों पर हुए हमले के पीछे ईरान का हाथ था. हालाँकि ईरान इन आरोपों का खंडन करता है. बातचीत अमरीका के साथ-साथ यूरोपीय देश भी चाहते हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर प्रस्तावित बातचीत में शामिल हो. इस साल अगस्त में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम दोबारा शुरू कर दिया था और बातचीत स्थगित हो गई थी. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है जिसका लक्ष्य है ऊर्जा का उत्पादन. लेकिन अमरीका का कहना है कि उसे ईरान की बातों पर भरोसा नहीं. दरअसल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत तीन यूरोपीय देशों की अगुआई में वर्ष 2003 में शुरू हुई थी. ये देश हैं- ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी. लेकिन अगस्त में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम फिर शुरू कर दिया और बातचीत स्थगित हो गई. अब पश्चिम देश यह चाहते हैं कि यूरोपीय देशों की पहल पर हो रही बातचीत में ईरान फिर से शामिल हो. रविवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि ईरान बातचीत में फिर शामिल होने पर विचार कर सकता है लेकिन उन्होंने इसका संकेत नहीं दिया कि ईरान परमाणु तकनीक विकसित करने का कार्यक्रम छोड़ने की बात स्वीकार कर सकता है. अगर ईरान पश्चिमी देशों की मांग नहीं मानता है तो माना जा रहा है कि अमरीका और ब्रिटेन इस मामले को सुरक्षा परिषद में ले जा सकते हैं. हालाँकि कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि वे इस बारे में कोई समयसीमा निर्धारित करना नहीं चाहती. |
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