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ईरान पर परमाणु कार्यक्रम के आरोप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह पिछले क़रीब 18 साल से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन साथ ही इस मुद्दे पर अपने इरादों के बारे में झूठ भी बोल रहा है. जॉन बोल्टन ने बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान मध्य एशिया में बाक़ी देशों को डराने-धमकाने के लिए परमाणु हथियार हासिल करना चाहता है और हो सकता है कि ईरान ऐसे हथियार आतंकवादियों को भी देना चाहे. जॉन बोल्टन ने कहा कि ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का उल्लंघन किया है. उधर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में अमरीकी आरोपों का खंडन करता रहा है. ईरान का कहना है कि वह परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ असैनिक उद्देश्यों के लिए विकसित करना चाहता है. इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ईरान के परमाणु मुद्दे पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के लिए मॉस्को का दौरा कर रही हैं. 'छुपाव और धोखा' शुक्रवार को बीबीसी के न्यूज़नाइट कार्यक्रम में बातचीत करते हुए जॉन बोल्टन ने कहा, "मेरा ख़याल है कि ईरान पिछले क़रीब 18 साल से परमाणु हथियार कार्यक्रम चला रहा है." ""वे अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छुपाने और धोखा देने में व्यस्त हैं और उन्होंने इससे पहले धमकियाँ भी दी हैं." जॉन बोल्टन ने कहा कि असल मुद्दा ये है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक ऐसे ईरान को स्वीकार करने जा रहा है जो परमाणु अप्रसार संधि के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का उल्लंघन करता है, जो अपने कार्यक्रम के बारे में झूठ बोलता है और ऐसे परमाणु हथियार बनाने पर तुला हुआ है जो बैलिस्टिक मिसाइलों पर लादे जा सकते हैं.
जॉन बोल्टन ने कहा, "ईरान ये परमाणु हथियार न सिर्फ़ अपने आसपास के देशों को डराने-धमकाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है बल्कि संभवतः उन्हें आतंकवादियों को भी दे सकता है." अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस इससे पहले कह चुकी हैं कि ईरान या तो अपने परमाणु मुद्दे पर यूरोपीय संघ से बातचीत फिर से शुरू करे नहीं तो उसके परमाणु कार्यक्रम मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेज दिया जाएगा. ईरान ने गत अगस्त में बातचीत से हाथ खींच लिया था. बातचीत का मक़सद ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को रोकना था. राइस ने शुक्रवार को पेरिस में बातचीत करते हुए ईरान को चेतावनी दी, "बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहता है... लेकिन सुरक्षा परिषद का विकल्प भी हमेशा तैयार रहता है." "इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि ईरान विश्वास बनाए रखने के लिए बातचीत में शामिल हो." फ्रांस ईरान के परमाणु कार्यक्रम मुद्दे पर कूटनयिक रुख़ का हिमायती रहा है लेकिन शुक्रवार को राइस से बातचीत के बाद फ्रांस के विदेश मंत्री फ़िलिप डॉस्टे ब्लेज़ी ने कहा कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र को सौंपना एक सही विकल्प हो सकता है. |
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