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फ़लस्तीनियों को ख़तरे में डालने पर रोक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने चरमपंथियों को पकड़ने के लिए चलाए जाने के इसराइली सेना के अभियानों में फ़लस्तीनी नागरिकों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. इसराइल के मुख्य न्यायाधीश अहरोन बराक ने गुरूवार को कहा कि आम लोगों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने की आदत से उन्हें सेना के साथ सहयोग करने पर मजबूर होना पड़ता है और इससे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन होता है. मानवाधिकार संगठनों ने 2002 में इस बारे में याचिका दायर की थी उन पर सुनवाई के दौरान ही न्यायालय ने गुरूवार को यह फ़ैसला सुनाया. 2002 में न्यायालय ने अस्थाई तौर पर इसराइली सेना को इसे रोकने के आदेश दिए थे. मानवाधिकार संगठनों ने कहा था कि इसराइली सेना ने अस्थाई प्रतिबंध का उल्लंघन किया है. जवाब में इसराइली सेना ने कहा था कि वे फ़लस्तीनी लोगों को मानव ढाल के तौर पर तभी इस्तेमाल करेंगे जब वे इसके लिए राज़ी होंगे. मुख्य न्यायाधीश अहरोन बराक ने कहा कि इसराइली सेना अपने उद्देश्यों के लिए आम लोगों का इस्तेमाल नहीं कर सकती. उन्होंने कहा, "आप अपनी सैनिक ज़रूरतों के लिए आम लोगों का शोषण नहीं कर सकते और आप उन्हें अपने साथ सहयोग करने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकते." इस तरह के अभियानों में अनेक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं जब उन्हें संदिग्ध चरमपंथियों के घरों की तरफ़ बढ़ने के लिए मजबूर किया गया. |
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