|
'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के बारे में एक अहम भाषण दिया है और कहा है कि वे "पूरी जीत से पहले नहीं रूकेंगे." अमरीका के राष्ट्रपति ने कहा कि इराक़ में जारी हिंसा अल क़ायदा की रणनीति का हिस्सा है, उन्होंने कहा कि अल क़ायदा की रणनीति को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा. बुश ने कहा कि अगर अल क़ायदा के चरमपंथी ये सोचते हैं कि अमरीका इराक़ में जारी हिंसा की वजह से वहाँ से पीछे हट जाएगा तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है. माना जा रहा है कि बुश ने यह भाषण अपने विरोधियों को चुप कराने के उद्देश्य से दिया है, उनकी इराक़ नीति की कड़ी आलोचना हो रही है और ग्वांतानामो बे बंदीगृह के मामले में सीनेट के फ़ैसले से भी उन्हें झटका लगा है. बुश ने चेतावनी दी कि अल क़ायदा के चरमपंथी हिंसा फैलाकर सरकारों को हटाना चाहते हैं, बुश ने कहा कि मिस्र, जॉर्डन और पाकिस्तान ऐसे देश हैं जिनके बारे में चरमपंथी सोचते हैं कि वहाँ वे नियंत्रण हासिल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि "सद्दाम हुसैन जैसे तानाशाह को हटाने के बाद, चरमपंथियों की सत्ता हथियाने की कोशिश के सामने अमरीका मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता." अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि "इसे इस्लामी जिहाद, इस्लामी आतंकवाद, धर्म की लड़ाई, अनेक नामों से पुकारा जाता है लेकिन यह दरअसल सिर्फ़ अंधी हिंसा है जिसे धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए." उन्होंने कहा, "इस हिंसा को फैलाने वाले शैतान हैं और शैतानों को हर हाल में रोका जाएगा." अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस्लाम की ग़लत व्याख्या कुछ लोग हिंसा फैलाने के लिए कर रहे हैं, उनका इस्लाम के असली स्वरूप से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि "अमरीका पूरी दुनिया में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है और यह लड़ाई जारी रहेगी." बुश ने कहा कि आतंकवाद चाहे दुनिया में कहीं भी हो, किसी भी रूप में हो उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता, इस सिलसिले में उन्होंने कश्मीर, चेचेन्या, पाकिस्तान और अल्जीरिया का नाम लिया. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||