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'संविधान का काम समय पर पूरा होगा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में नए संविधान बनाने के लिए बनी कमेटी के प्रमुख ने कहा है कि 15 अगस्त तक मसौदा बनाने का काम पूरा हो सकता है. शेख हुमाम हामुदी ने कहा कि मसौदे पर बहस के लिए इसे दो हफ़्ते के अंदर संसद भेजा जाएगा जिसके बाद इस पर मतदान होगा. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ शेख हुमाम ने कहा है कि संविधान का सिर्फ़ एक अध्याय लिखा जाना बाक़ी है. संविधान के मसौदे में इस बात को लेकर मतभेद हैं कि किस हद तक सत्ता का विकेंद्रीकरण किया जाए और देश में इस्लाम की क्या भूमिका हो. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ शिया, सुन्नी और क़ुर्द समुदायों के बीच मतभेदों के चलते अंतिम समझौता नहीं हो पा रहा. अभी तक इस बात पर भी सहमति नहीं हुई है कि नए संविधान में देश का नाम क्या रखा जाए. कमेटी प्रमुख ने कहा है कि मसौदे को लेकर उठे मतभेद दूर करने के लिए राजनैतिक नेता पाँच अगस्त को मिलेंगे. अमरीकी दबाव इस चार्टर पर 15 अक्तूबर को जनमतसंग्रह करवाया जाएगा जिसके बाद संसदीय चुनाव होगा जो 15 दिसंबर तक संपन्न हो जाएगा. संविधान बनाने का काम समय पर पूरा करने के लिए अमरीका लगातार कमेटी पर दबाव डालता रहा है. इसी सिलसिले में अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड पिछले हफ़्ते बग़दाद आए थे. अमरीका को डर है कि देरी होने से विद्रोही इसका फ़ायदा उठा सकते हैं. संविधान बनाने के काम में लगी कमेटी भी मानती है कि विद्रोहियों को कमज़ोर करने और सुन्नी मुस्लिमों को राजनैतिक प्रकिया में शामलि करने के लिए संविधान की अहम भूमिका है. |
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