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इराक़ से सैनिक वापसी का बड़ा सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अमरीकी सेना के कमांडर जनरल जॉर्ज केसी ने कहा है कि अमरीकी सेना इराक़ से कब लौटेगी ये इस आधार पर तय होगा कि अगले 75 दिनों में इराक़ में क्या होता है. अमरीकी सांसदों को ये जानकारी देते हुए जनरल जॉर्ज केसी ने ये भी कहा कि विद्रोह से अपने ही बल पर निपट सकने वाली इराक़ी बटालियनों की संख्या तीन से कम होकर एक ही रह गई है. इस बीच, इराक़ में अलग अलग हमलों में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका इस बड़े सवाल का जवाब चाहता है कि इराक़ से उसकी सेना कब वापिस लौटेगी. लेकिन अमरीकी सांसदों से के सवालों का जवाब देते हुए इराक़ में अमरीकी सेना के कमांडर जनरल जॉर्ज केसी ने कोई साफ़ जवाब नहीं दिया. जनरल केसी ने कहा, “गठबंधन की सेनाएँ अमरीका से कम हों ये हमारी रणनीति का हिस्सा है.....लेकिन सेना का वापिस आना या न आना परिस्थितियों पर निर्भर है...” लेकिन फिर एक सीनेटर कार्ल लेविन ने उनसे पूछा, "क्या आप कह रहे हैं कि अगले साल लगभग इस समय ऐसी परिस्थितियाँ होंगी कि सेना वापिस आ सके?” इस पर जनरल जॉर्ज केसी ने कहा, “सेनेटर, अगले 75 दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे...जो एक तरह से ये तय करेंगे कि इराक़ का भविष्य कैसा होगा. तो हम इंतज़ार करना चाहेंगे... एक बार ये राजनीतिक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो हम ये तय कर सकेंगे.” जनमतसंग्रह इराक़ में अक्तूबर में नए संविधान पर जनमत संग्रह होगा और दिसंबर में चुनाव होंगे और जनरल केसी यही बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले दिन तय करेंगे कि अमरीकी सेना कब वापिस आती है.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने हाल ही में कहा था कि आने वाले कुछ दिनों में इराक़ में हिंसा बढ़ेगी. इसके अलावा जनरल केसी ने कहा कि इराक़ में अमरीकी सेना की मदद के बिना लड़ने वाली इराक़ी बटालियन 3 से कम होकर 1 रह गई है और इराक़ी शहर बलाद में गुरूवार को तीन आत्मघाती कार बम हमलों में कम से कम 60 लोग मारे गए. सूर्यास्त के बाद बलाद शहर के एक खचाखच भरे बाज़ार में ये तीन विस्फ़ोट कुछ ही मिनटों के फ़ासले से हुए. उधर, रमादी शहर में हुए एक हमले में कम से कम पाँच अमरीकी सैनिक मारे गए हैं. बग़दाद से बीबीसी संवाददाता रिचर्ड गैल्पिन कहते हैं कि हाल में अल्पसंख्यक सुन्नी मुसलमान बहुसंख्यक शियाओं पर हमले करते रहे हैं. |
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