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ब्रितानी सैनिकों के गिरफ़्तारी वारंट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के दक्षिणी शहर बसरा में एक जज ने दो ब्रितानी सैनिकों की गिरफ़्तारी के वारंट जारी किए हैं. जज ने बीबीसी को बताया कि इन दो ब्रितानी सैनिकों को गत सोमवार को एक मुठभेड़ में इराक़ियों की मौत के मामले में गिरफ़्तारी वारंट जारी किए गए हैं. उधर ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि गिरफ़्तारी वारंट की कोई क़ानूनी हैसियत नहीं है क्योंकि इराक़ में ब्रितानी सेनाओं पर ब्रिटेन के ही क़ानून लागू होते हैं, इराक़ के नहीं. ब्रितानी सैनिकों ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने अपने विशेष दस्ते (एसएएस) के दो सैनिकों को शिया चरमपंथियों के क़ब्ज़े से छुड़ाया था जिन्हें पहले इराक़ी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. लेकिन इराक़ी अधिकारियों ने ब्रितानी सैनिकों के दावे को ग़लत बताते हुए कहा था कि गिरफ़्तार ब्रितानी सैनिक इराक़ी पुलिस की ही हिरासत में थे. इन दो ब्रितानी सैनिकों के बारे में कहा गया था कि उन्हें इराक़ी पुलिस ने तब पकड़ा था जब वे अरब भेस में चोरी-छुपे सक्रिय थे. क़ानूनी स्थिति ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसे दो सैनिकों के गिरफ़्तारी वारंट की ख़बरों की तो ख़बर है लेकिन यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि क्या ऐसे वारंट वास्तव में जारी किए गए हैं. ब्रितानी सेनाओं के प्रवक्ता मेजर स्टीव मेलबोर्न ने कहा कि उन दोनों ब्रितानी सैनिकों को इराक़ सरकार और गठबंधन सेनाओं के बीच हुई सहमति के तहत ऐसे किसी मुक़दमे से संरक्षा हासिल है.
मेजर स्टीव मेलबोर्न ने बीबीसी से कहा, "उन्हें ऐसे गिरफ़्तारी वारंट जारी करने का कोई क़ानूनी आधार हासिल नहीं है." प्रवक्ता ने कहा, "हम इराक़ियों के साथ निकट सहयोग के साथ काम करना जारी रखेंगे और इसके लिए बसरा में जाँच दल बनाया गया है. जाँच शुरू हो चुकी है और हम देखेंगे कि सोमवार रात की घटना की जाँच में क्या निकलकर आता है." लेकिन बसरा के जज ने कहा है कि वह इस बात से संतुष्ट नहीं है कि वे दो ब्रितानी सैनिक हैं इसलिए उन्हें सिर्फ़ इसी आधार पर इराक़ में गिरफ़्तारी और मुक़दमे से छूट मिल सकती है. बीबीसी संवाददाता रिचर्ड गैल्पिन का कहना है कि अगर उन दोनों सैनिकों को दोषी पाया जाता है तो उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है. 'सहयोग नहीं' बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऐसा माना गया है कि वो दो ब्रितानी सैनिक बसरा में एक ख़ुफ़िया मिशन पर थे जब उन्हें इराक़ी पुलिस अधिकारियों ने चुनौती दी थी. इराक़ी पुलिस और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय का कहना है कि उन सैनिकों ने चुनौती दिए जाने पर गोली चलाई थी. उस घटना के बाद बसरा में इराक़ी अधिकारियों ने कहा था कि वे ब्रितानी सैनिकों के साथ सहयोग नहीं करेंगे. बसरा के गवर्नर मोहम्मद अल वलीली ने कहा था कि जब तक उन सैनिकों को रिहा कराने के लिए जो बल प्रयोग किया, उसके लिए माफ़ी नहीं मांगेंगे. ब्रिटेन ने अपने सैनिकों की कार्रवाई को यह कहते हुए सही ठहराया था कि उन सैनिकों को स्थानीय मिलिशिया को सौंप दिया गया था और उनकी जान को ख़तरा था. लेकिन इराक़ के आंतरिक सुरक्षा मंत्री बाक़र सोलाग़ जब्र ने इन दावों का खंडन किया था. ब्रितानी सेनाओं ने बसरा में सड़कों पर अपने सैनिकों की संख्या कम कर दी है. बुधवार को इराक़ी प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री ने ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन रीड से लंदन में मुलाक़ात की थी और कहा था कि इस घटना से दोनों देशों के संबंधों में कोई तनाव नहीं आया है. |
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