|
कैसी है ओपस डी की दुनिया ? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कैथोलिक धर्म का विवादास्पद संगठन ओपस डी लोकप्रिय उपन्यास दा विंची कोड के बाद एक बार फिर चर्चा में है. उपन्यास के अनुसार ओपस डी एक ऐसा गुप्त संगठन है जो धन और शक्ति एकत्र करने के लिए जाना जाता है. ओपस डी की स्थापना स्पेन में की गई थी और बीबीसी संवाददाता मैक्स सीट्ज़ के अनुसार इस संगठन कैथोलिक धर्म का सबसे प्रभावशाली संगठन माना जा सकता है. लैटिन में ओपस डी का अर्थ होता है भगवान का काम. इस संगठन पर ईसाई धर्म को मानने वालों को भटकाने का आरोप लगता रहा है जिसे संगठन खारिज करता है. स्पेन की सड़कों पर लोगों से बातचीत करने पर वो कहते हैं कि ओपस डी एक गुप्त संस्था है जो राजनीति और व्यवसाय को प्रभावित करता है. ओपस डी की असलियत ओपस डी का दावा है कि पूरी दुनिया में उसके 85000 सदस्य हैं जिसमें से एक तिहाई स्पेन में हैं.
सदस्यों को कहा है जाता है कि वो और लोगों को अपने काम के ज़रिए ईसाई बनने के लिए प्रेरित करें. दूसरे शब्दों में लोगों से अपने कार्य में बहुत सफल होने के लिए कहता है दूसरों की मदद के लिए प्रेरित करता है ताकि वो और लोगों को सदस्य बना सके. तीन साल पहले 2002 में ओपस डी के संस्थापक जोसे मारिया एस्क्रिवा को उनकी मौत के मात्र 27 साल बाद जब पोप जॉन पॉल द्वितीय ने सम्मानित किया था तो उस समारोह में दुनिया भर से हज़ारों ओपस डी सदस्य वैटिकन पहुंचे थे. पोप ने ओपस डी को विशेष दर्ज़ा दिया जिससे संगठन कई प्रकार की सुविधाएं मिल गई. यह भी कहा जाता है कि पोप जॉन पॉल द्वितीय के समय में ओपस डी अत्यधिक प्रभावी हो गया. हालांक संगठन के प्रवक्ता जैक वलेरो इसका खंडन करते हैं. वो कहते हैं " वैटिकन में ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है जो ओपस डी के सदस्य हैं. पांच या छह लोग हैं मात्र जिनमें से एक पोप के प्रवक्ता जोआक्विन नवारो वाल्स भी हैं. वैटिकन पर ओपस डी के प्रभाव को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है. " आलोचकों का कहना है कि दुनिया में ऐसे पादरियों की संख्या बहुत अधिक है जो ओपस डी से जुड़े हुए हैं. इससे चर्च के अलावा चर्च जैसी एक और संस्था का भ्रम होता है. दुनिया भर की कई सरकारों के नेता और अधिकारीगण भी ओपस डी से जुड़े हुए हैं. इनमें से एक नाम ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री रुथ केली का भी है. ओपस डी का नियंत्रण
लैटिन अमरीका में कोलंबिया के राष्ट्रपति अल्वारो उरीबे भी ओपस डी के सदस्य कहे जाते हैं लेकिन उन्होंने इन ख़बरों की पुष्टि नहीं की है. प्रवक्ता जैक वलेरो का कहना है कि धर्म एक ऐसी चीज़ है जो निजी होती है और ओपस डी की सदस्यता भी निजी मसला है. यह पता करना मुश्किल काम है कि ओपस डी के पास पैसा कितना है लेकिन इतना तय है कि दुनिया भर की कई संस्थाएं ओपस डी चलाती है और उसे अपने सदस्यों से भारी रकम मिलती है. ऐसी ही एक पूर्व न्यूमरेरी कारमेन चारो कहती हैं कि इन केंद्रों में जीवन एक सपने जैसा होता है. वो कहती हैं " इन केंद्रों में आपकी दुनिया कोई और ही चलाता है. उन पर धार्मिक गुरुओं का नियंत्रण रहता है. आपके पैसे पर और आपकी पूरी ज़िदगी उनके हाथ में होती है. " हालांकि ओपस डी कहता है कि ऐसे केंद्रों में लोग अपनी मर्ज़ी से आते हैं और संगठन छोड़ने के लिए वो पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं. प्रवक्ता जोसे मारिया कहते हैं कि यह संगठन भी लोग ही चलाते हैं और उनसे ग़लतियां भी हो सकती हैं. तो क्या हैं ओपस डी के सदस्य. संत या अपराधी. स्पेन के सड़कों पर लोग कहते हैं कि इसका उत्तर इन दोनों के बीच कहीं है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||