| उत्तर कोरिया परमाणु कार्यक्रम छोड़ देगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को बंद कर परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने को तैयार हो गया है. उत्तर कोरिया ने अपने पड़ोसी देशों और अमरीका के साथ इस बात की सैद्धांतिक सहमति के एक समझौते पर दस्तख़त भी कर दिए हैं. इस समझौते का आम तौर पर स्वागत किया गया है लेकिन साथ ही ये भी माना जा रहा है कि समझौते को लागू करना इतना आसान नहीं होगा और तभी ये तय किया जा सकेगा कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के मामले में वास्तविक प्रगति हुई है या नहीं. तीन वर्षों से उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद जारी था, ख़ास तौर पर अमरीका और दक्षिण कोरिया के साथ. अगर इस समझौते को दोनों पक्ष पूरी तरह लागू करते हैं तो कोरिया प्राय:द्वीप परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र बन जाएगा. एक समय वो था जब अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उत्तर कोरिया को 'दुष्टता की धुरी' करार दिया था और अब ये समझौता हुआ है. तो इस समझौते में किसने किसे क्या दिया है? चीन के विदेश उपमंत्री वू दावेई ने एक पत्रकार वार्ता में कहा, "उत्तर कोरिया ने वादा किया है कि वो सारे परमाणु हथियार और अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ देगा और परमाणु अप्रसार संधि और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था की शर्तों को मानेगा." लेकिन साथ ही उत्तर कोरिया ने कहा है कि शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उसका अधिकार है. अन्य पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है और कहा है कि लाइट वाटर रिएक्टर के लिए बातचीत सही समय पर की जाएगी. चीन के विदेश उपमंत्री वू दावेई ने ये भी कहा कि अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच एक दूसरे की संप्रभुता को स्वीकार करने और शांतिपूर्ण माहौल में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे. उत्तर कोरिया को अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने के लिए आर्थिक सहायता और सुरक्षा की गारंटी दी गई है. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई ने इस समझौते का स्वागत किया है, "ये समझौता दोनों पक्षों के बीच संतुलन रख पाया है. जहाँ उत्तर कोरिया की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का यहाँ ख़्याल रखा गया है वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय की परमाणु हथियार संबंधी चिंताओं का भी." अमरीका के प्रमुख मध्यस्थ क्रिस्टोफ़र हिल ने कहा है जब इस समझौते को ज़मीन पर लागू किया जाएगा तभी ये तय किया जा सकेगा कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के मामले में वास्तविक प्रगति हुई है या नहीं. |
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