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परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरी कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर क़रीब एक साल से बंद पड़ी बातचीत बीज़िंग में एक बार फिर शुरू हो गई है. छह देशों की इस बातचीत का मुख्य मकसद उत्तरी कोरिया को अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने पर राज़ी करना है. इसके बदले में उसे आर्थिक मदद और सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी. बातचीत शुरू होने से पहले अमरीका के वार्ताकार क्रिस्टोफ़र हिल ने उत्तरी कोरिया के वार्ताकार से अलग से बात की. उत्तरी कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर क़रीब एक साल पहले बातचीत से हाथ खींच लिया था लेकिन इस महीने वह अमरीका, रूस, चीन, जापान और दक्षिणी कोरिया के साथ चौथे दौर की वार्ता करने के लिए तैयार हो गया था. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ बैठक में कोई बड़ा नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है. हालाँकि वार्ताकारों का कहना है कि इस बार वो लचीला रूख़ अपनाएँगे. अमरीकी वार्ताकार ने कहा है कि वो इस मंशा से आएँ हैं कि बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाया जाए. बातचीत में बाधा उत्तरी कोरिया अमरीका के साथ समझौता करना चाहता है लेकिन परमाणु कार्यक्रम बंद करने के एवज़ में वो मदद की माँग कर रहा है. उत्तरी कोरिया ख़ुद को परमाणु शक्ति घोषित कर चुका है लेकिन उसने इन आरोपों से इनकार किया है कि वो यूरेनियम संवर्धन की दूसरी योजना पर क़ाम कर रहा है. उधर अमरीका उत्तरी कोरिया के परमाणु कार्यक्रम बंद करने तक किसी भी समझौते से इनकार करता रहा है. वहीं दक्षिण कोरिया, चीन और रूस इस बात से चिंतित हैं कि अगर जापान इस बैठक में उत्तरी कोरिया द्वारा पूर्व में जापानी नागरिकों के अपहरण का मुद्दा उठाता है तो वार्ता ख़तरे में पड़ सकती है. 2002 में उत्तरी कोरिया ने स्वीकार किया था कि उसने 70 और 80 के दशक में 13 जापानी नागरिकों का अपहरण किया था. |
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